नई दिल्ली. कोरोना वायरस के बीते 24 घंटों में 2 लाख 61 हजार 500 नए मरीज मिले हैं. करीब 3 दिनों से देश में लगातार 2 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे हैं. एक्सपर्ट्स इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि नया और संभवत: कोरोना वायरस (Coronavirus) का ज्यादा संक्रामक रूप मामले बढ़ने का असल कारण है. इसे जानकार डबल म्यूटेंट (Double Mutant) भी कह रहे हैं. अब जब नागरिक लगातार वायरस की नई लहर का सामना कर रहे हैं, तो हमने मामले से जुड़े कुछ सवालों को लेकर देश के जाने-माने महामारी विशेषज्ञ प्रोफेसर के श्रीनाथ रेड्डी से चर्चा की.

भारत में कोरोना वायरस के कौन से रूप के चपेट में आने की संभावना ज्यादा है? यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप भारत के किस हिस्से में रहते हैं या सफर करते हैं. पंजाब और दिल्ली में आपके B.1.1.7 के संपर्क में आने की संभावना है. महाराष्ट्र और पड़ोसी राज्य में आप B.1.617 (डबल म्यूटेंट) का शिकार हो सकते हैं. भारत में कोरोना वायरस के दूसरे म्यूटेंट्स का भी पता लगा है. केरल में मिला N440K वैरिएंट आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी पाया गया है. यह वैरिएंट 16 देशों में मिला है. इसके अलावा दक्षिण अफ्रीकी और ब्राजील की लाइनेज भी भारत में कम संख्या में मिली है.

क्या भारत में मिले वैरिएंट्स पर वैक्सीन काम करेगी?
इसका आकलन करने के लिए जांच की जा रही हैं. एस्ट्राजेनेका का भारतीय रूप कोविशील्ड है. इस वायरस सेक्टर वैक्सीन को स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ तैयार किया गया है. B.1.617 वैरिएंट में E.484Q नाम का म्यूटेशन कंपोनेंट होता, जो E.484K की तरह है. एस्ट्राजेनेका कि इस वैरिएंट ने दक्षिण अफ्रीका में इम्यून सिस्टम पर प्रभावकारिता कम दिखा है. कोविशील्ड के खिलाफ उस वैक्सीन के साथ क्या हो रहा है, इस बात की जानकारी के लिए हमें जानकारी की जरूरत है.

कोवैक्सीन एक निष्क्रिय वायरस वैक्सीन है. ये इम्यून प्रतिक्रिया के लिए शरीर को ज्यादा वायरल एंटीजन्स देती है. इसमें भी स्पाइक प्रोटीन शामिल है, लेकिन यह यहीं तक सीमित नहीं है. यह वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ म्यूटेशन दिखाने वाले वैरिएंट्स पर असरदार हो सकती है.

अगर वैक्सीन काम कर रही हैं, तो मुझे ‘नई चीजों’ के बारे में क्यों पता चल रहा है?
सभी ट्रायल की हुईं और मंजूरी प्राप्त वैक्सीन कोविड-19 के गंभीर मामलों और मौत के खिलाफ सुरक्षा देने के लिए तैयार की गई हैं. ये वैक्सीन IgM और IgG एंटीबॉडीज के साथ टी सेल्स के जरिए सेल्युलर इम्युनिटी के जरिए इम्यून रिस्पॉन्स निकालती हैं. ये इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन के जरिए दी जाती हैं. ये नाक और गले की म्यूकोसल सतह से वायरस साफ करने वाले सेक्रेटरी एंटीबॉडी IgA तैयार नहीं करती हैं.

क्या मुझे दूसरे वैरिएंट्स के बारे में चिंतित होना चाहिए? क्या यह सही है कि वैरिएंट्स बचकर निकल सकती है?
कई वैक्सीन में दक्षिण अफ्रीका में पहली बार मिले वैरिएंट के खिलाफ प्रभावकारिता कम देखी गई है. हालांकि, ऐसी कई वैक्सीन हैं, जो गंभीर बीमारी के खिलाफ 50 प्रतिशत से ज्यादा सुरक्षा दे रही हैं. हमारे पास ऐसी कई वैक्सीन हैं, जिन्हें वैरिएंट्स के बचकर निकलने की चुनौती से लड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है.

क्या मुझे बूस्टर शॉट लेने की जरूरत है?
मौजूदा वैक्सीन के साथ हां आपको बूस्टर की जरूरत है. पहला शॉट आपके इम्यून सिस्टम को प्रतिक्रिया के लिए तैयार करता है. वहीं, बूस्टर आपकी इम्यूनिटी को और बढ़ता है.

क्या मुझे घर पर ही रहना चाहिए, भले ही वैक्सीन लग चुकी हो?
आपको सही तरह से मास्क पहनने, भीड़ से बचने और खराब वेंटिलेशन वाले जगहों से बचने जैसी सावधानियां लेनी चाहिए. घर से बाहर निकलते समय खुद से सावधानियां और सरकार के नियमों का ध्यान रखे. अब चाहे ओरिजिनल वायरस हो या वैरिएंट, यह आपके शरीर में केवल नाक, मुंह और आंख के जरिए ही घुस सकता है. अगर आप इन जगहों पर पहुंचने वाले रास्तों को सुरक्षित कर सकते हैं, तो आप वैरिएंट्स के खिलाफ भी सुरक्षित रहेंगे.

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