सियोल। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक येओल को आज पिछले साल की गई अपनी अल्पकालिक मार्शल लॉ की घोषणा के लिए अपने पद से हाथ धोना पड़ा। उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। संवैधानिक न्यायालय ने महाभियोग का सामना कर रहे येओल को उनके पद से तत्काल हटाने की घोषणा की। संवैधानिक न्यायालय ने शुक्रवार सुबह 11:22 बजे अपना फैसला सुनाया। फैसला सुनकर संवैधानिक न्यायालय के बाहर एकत्र लाखों लोग खुशी से उछल पड़े। उन्होंने लोकतंत्र की जीत का जश्न मनाते हुए न्यायालय के पक्ष में नारे लगाए।
कोरिया टाइम्स अखबार के अनुसार, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मून ह्युंग-बे ने राष्ट्रपति यून सुक येओल को पद से तत्काल हटाने की घोषणा की। जैसे ही न्यायालय के बाहर लगी बड़ी टीवी स्क्रीन पर ‘महाभियोग की सजा’ शब्द दिखाई दिया, लोग उछल पड़े। एक-दूसरे को गले लगाया। कई लोग तो लोकतंत्र की जीत पर फूट-फूट कर रोने लगे। इस दौरान यह लोग काफी देर तक नारा लगाते रहे- ‘विजय! विजय! लोकतंत्र अमर रहे’। यह देखकर अपदस्थ नेता यून सुक येओल ने कहा, ”मुझे सच में खेद है और दिल टूट गया है कि मैं आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका।”
संवैधानिक न्यायालय ने राष्ट्रपति येओल के महाभियोग को बरकरार रखा। इसके बाद उन्हें तत्काल पद से हटा दिया गया। राष्ट्रपति को पद से हटाने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। संवैधानिक न्यायालय के सभी न्यायाधीशों ने 8-0 के मत से पक्ष में मतदान किया। उल्लेखनीय है कि नेशनल असेंबली ने 111 पहले येओल के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया था। येओल पर तीन दिसंबर को मार्शल लॉ घोषित करने के लिए उन पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया था। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मून ह्युंग-बे ने सुबह 11 बजे फैसला पढ़ना शुरू किया। उन्होंने 11ः22 बजे कहा कि येओल को तत्काल राष्ट्रपति पद से हटाने का फैसला किया गया है।
इससे पहले मार्च 2017 में पूर्व राष्ट्रपति पार्क ग्यून-हे के महाभियोग के बाद आठ वर्षों में दक्षिण कोरिया में किसी मौजूदा राष्ट्रपति की यह पहली बर्खास्तगी है। संविधान के अनुच्छेद 68 के तहत, न्यायालय के फैसले के 60 दिनों के भीतर नया राष्ट्रपति चुनाव होना चाहिए। संभावना है कि राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव तीन जून या उससे पहले होगा। अब येओल और उनकी पत्नी किम कीन ही को मध्य सियोल के हन्नाम-डोंग में राष्ट्रपति निवास खाली करना होगा।