रांची। लोक आस्था का महापर्व चैती छठ शुक्रवार को संपन्न हो गया। चार दिवसीय छठ के मौके पर व्रतियों ने चौथे दिन उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। तीसरे दिन गुरुवार की शाम छठ व्रतियों ने अस्तालगामी भगवान भास्कर(डूबते सूर्य) को पहला अर्घ्य अर्पित किया था। राजधानी रांची में छठ व्रतियों ने हजारों की संख्या में अलग-अलग तालाब और नदियों एवं घरों में भगवान भास्कर की पूजा की।
रांची के बड़ा तालाब, कोकर तिरिल तलाब, डिस्टलरी तलाब, जुमार नदी, धुर्वा डैम सहित अन्य स्थानों सुबह से ही लोग स्नान कर पूजा की सामाग्री दउरा और सूप में सजाकर पहुंचे थे। इस दौरान लोगों ने उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया।
छठ पूजा के चौथे दिन उगते सूर्य यानी उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ व्रतियों ने 36 घंटे का अपना निर्जला उपवास का पारण किया। सभी के बीच ठेकुआ सहित अन्य प्रसाद का वितरण किया गया।
पुरोहित मनोज पांडे ने बताया कि उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे पौराणिक मान्यताएं हैं। मान्यताओं के अनुसार, सूर्य षष्ठी का व्रत आरोग्य की प्राप्ति, सौभाग्य और संतान के लिए रखा जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार, राजा प्रियव्रत ने भी छठ व्रत रखा था। उन्हें कुष्ट रोग हो गया था। इस रोग से मुक्ति के लिए भगवान भास्कर ने भी छठ व्रत किया था।