रांची। झारखंड के चर्चित IAS विनय चौबे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति एआर चौधरी की अदालत ने विनय चौबे की जमानत याचिका को खारिज करते हुए अपना फैसला सुना दिया है। इससे पहले अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था।

नियमों को ताक पर रखकर हुआ खेल

यह मामला हजारीबाग में उपायुक्त (DC) के पद पर तैनाती के दौरान का है। आरोप है कि विनय चौबे ने वन विभाग की पांच प्लॉटों की जमीन, जो सरकारी दस्तावेजों में ‘गैरमजरूआ खास जंगल झाड़ी’ के रूप में दर्ज थी, उसे अवैध तरीके से जमाबंदी करा दिया। वन संरक्षण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के अनुसार, केंद्र सरकार की अनुमति के बिना ऐसी भूमि का उपयोग किसी भी गैर-वानिकी कार्य के लिए नहीं किया जा सकता है।

साजिश और जांच का शिकंजा

एसीबी (ACB) की जांच में यह बात सामने आई है कि तत्कालीन अधिकारियों और खरीदार विनय सिंह ने मिलकर एक आपराधिक साजिश रची और सरकारी जमीन का मालिकाना हक अवैध तरीके से बदलवा दिया। हालांकि, साल 2013 में ही इन अवैध जमाबंदियों को रद्द कर दिया गया था। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 सितंबर 2025 को प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसके बाद से ही कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है।

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