रांची (आजाद सिपाही)। राजधानी रांची में अपराधियों और अनैतिक कार्यों में संलिप्त लोगों ने कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक नया तरीका निकाल लिया है। मरीजों को जीवनदान देने वाली एंबुलेंस का इस्तेमाल अब देह व्यापार के लिए ‘पिकअप और ड्रॉप’ वाहन के तौर पर किया जा रहा है। स्टेशन रोड स्थित पटेल चौक पर मंगलवार की आधी रात को सामने आये एक नजारे ने पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी और सामाजिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं।

पुलिस के डर से बदला तरीका:
दरअसल, राजधानी की सड़कों पर रात के वक्त पुलिस की गश्त और चौक-चौराहों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जाता है। देह व्यापार के इस सिंडिकेट ने पुलिस से बचने के लिए एंबुलेंस को अपना सुरक्षा कवच बना लिया है। एंबुलेंस को देखकर आम तौर पर पुलिसकर्मी उसे आपातकालीन सेवा मानकर बिना जांच किये जाने देते हैं। इसी रियायत का फायदा उठाकर दलाल और कॉल गर्ल शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक बेखौफ आ-जा रहे हैं। मंगलवार रात 12 बजे पटेल चौक पर देखा गया कि एक एंबुलेंस मरीजों को ले जाने की बजाय कॉल गर्ल को गंतव्य तक पहुंचाने के काम में लगी थी।

पर्यटकों और बाहरी लोगों पर नजर:
सूत्रों के अनुसार, इस धंधे से जुड़े लोग मुख्य रूप से उन्हें ग्राहक बनाते हैं, जो दूसरे राज्यों से रांची आते हैं। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के पास सक्रिय रहते हैं और बाहरी ग्राहकों से संपर्क करते हैं। बातचीत के दौरान सर्विस और पैसों का सौदा तय किया जाता है। एक बार सौदा पक्का होने के बाद ग्राहक को एंबुलेंस में बैठाया जाता है और साथ में कॉल गर्ल को भी भेजा जाता है। एंबुलेंस के जरिये ग्राहकों को सीधे होटल के गेट तक पहुंचाया जाता है, ताकि सड़क पर किसी की नजर न पड़े। इस पूरी प्रक्रिया में ‘इमरजेंसी सर्विस’ के सायरन और नीली-लाल बत्तियों का इस्तेमाल एक ढाल के रूप में हो रहा है।

एंबुलेंस और होटलों की जांच हो:
स्थानीय लोगों का कहना है कि ‘एंबुलेंस सिंडिकेट’ का भंडाफोड़ किया जाना जरूरी है। निजी एंबुलेंसों की आकस्मिक जांच की जाये। ताकि जीवन रक्षक सेवाओं की आड़ में चल रहे इस अनैतिक खेल को रोका जा सके।

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