वाशिंगटन/तेहरान: दुनिया भर में गहराते तेल और गैस संकट के बीच ईरान ने एक ऐसी कूटनीतिक पहल की है, जिससे वैश्विक राजनीति में हलचल मच गई है। ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए एक सशर्त शांति प्रस्ताव भेजा है। यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस पहुंच चुका है और इस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया का पूरी दुनिया बेसब्री से इंतजार कर रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा गई है और ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं।
मूंछ की लड़ाई और दुनिया पर गहराता संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक जलमार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव के कारण यह मार्ग पिछले कुछ समय से बाधित है। तेल और गैस से लदे सैकड़ों जहाज समुद्र के बीच फंसे हुए हैं, जिससे कई देशों में ईंधन की भारी किल्लत हो गई है। यह विवाद अब केवल दो देशों का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए ‘मूंछ की लड़ाई’ बन गया है। पाकिस्तान, ओमान, कतर और तुर्किये जैसे देश लगातार दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर रहे हैं ताकि युद्ध के खतरे को टाला जा सके।
ईरान के प्रस्ताव की मुख्य शर्तें: क्या है तेहरान का प्लान?
अमेरिकी न्यूज पोर्टल एक्सियोस और द नेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का यह नया प्रस्ताव अत्यंत विस्तृत है। इसमें मुख्य रूप से दो बातों पर जोर दिया गया है:
वैश्विक ऊर्जा संकट का समाधान: होर्मुज को तत्काल खोलकर तेल और गैस की सप्लाई बहाल करना।
अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी का अंत: ईरान चाहता है कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका अपनी सख्त नाकाबंदी हटाए।
सबसे चौंकाने वाली शर्त यह है कि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को बाद के चरण (लेटर स्टेज) में रखने की मांग की है। यानी ईरान चाहता है कि पहले युद्ध खत्म हो और व्यापार शुरू हो, उसके बाद परमाणु मुद्दों पर चर्चा की जाए।
व्हाइट हाउस का रुख: ट्रंप की ‘सिचुएशन रूम’ मीटिंग
व्हाइट हाउस ने प्रस्ताव मिलने की पुष्टि तो की है, लेकिन रुख अभी भी सख्त बना हुआ है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका मीडिया के जरिए कूटनीति नहीं करेगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि डोनाल्ड ट्रंप किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देंगे।
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप सोमवार को ‘सिचुएशन रूम’ में अपनी टॉप नेशनल सिक्योरिटी और फॉरेन पॉलिसी टीम के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में ईरान के इस ‘शांति प्रस्ताव’ की बारीकियों पर चर्चा होगी और यह तय किया जाएगा कि क्या अमेरिका को अपनी मांगों में ढील देनी चाहिए या नहीं।
ईरान के भीतर मतभेद और पाकिस्तान की भूमिका
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस समय कूटनीतिक दौरे पर हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से मुलाकात के बाद वे रूस पहुंचे हैं, जहां वे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस मुद्दे पर समर्थन मांगेंगे। हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती हैं कि ईरानी नेतृत्व के भीतर अमेरिकी मांगों को लेकर आम सहमति नहीं है। अमेरिका चाहता है कि ईरान कम से कम 10 साल के लिए यूरेनियम संवर्धन रोक दे और अपना सारा संवर्धित स्टॉक देश से बाहर भेज दे, जिस पर ईरान का कट्टरपंथी गुट राजी नहीं है।
क्या युद्ध विराम बढ़ेगा?
डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही सैन्य विराम को थोड़ा बढ़ा दिया है, लेकिन पाकिस्तान में प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता फिलहाल अधर में है। अराघची ने मध्यस्थ देशों (मिस्र, कतर और तुर्किये) को स्पष्ट कर दिया है कि वे रास्ता निकालना चाहते हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे। अब पूरी दुनिया की नजरें ट्रंप की सोमवार की बैठक पर टिकी हैं। यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो न केवल युद्ध टलेगा बल्कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें भी तेजी से नीचे आएंगी।

