रांची: झारखंड के आतंक और 15 लाख के इनामी कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन ने ओड़िशा पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। कुंदन के साथ उसके कुछ साथी भी हैं। हालांकि कुंदन के कुनबे के सरेंडर की आधिकारिक पुष्टि अभी तक झारखंड पुलिस मुख्यालय ने नहीं की है, लेकिन नक्सल सूत्रों ने उसके आत्मसमर्पण की खबरों को सही बताया है।
बीमारी के कारण किया सरेंडर
सूत्रों का कहना है कि कुंदन काफी समय से बीमार चल रहा था और थक कर उसने सरेंडर करने का मन बनाया। कुंदन पर फिलहाल 15 लाख रुपये का इनाम था। उस पर एक करोड़ रुपये के इनाम का प्रस्ताव पुलिस हेडक्वार्टर ने राज्य सरकार को दिया था। उस पर लूट, हत्या समेत कई मामले दर्ज हैं।
कुंदन पाहन रांची के तमाड़ का रहनेवाला है। कुंदन का वास्तविक नाम विकास है। उसका भाई डिंबा पाहन भी 15 लाख का इनामी था। माओवादी डिंबा पाहन ने खूंटी एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा के सामने दो महीने पहले सरेंडर किया था।
डिंबा पाहन के खिलाफ खूंटी, चाईबासा, रांची और सरायकेला में करीब 20 मामले दर्ज हैं। वहीं कुंदन का एक और भाई कुख्यात नक्सली श्याम पाहन हरियाणा के यमुना नगर से गिरफ्तार हो चुका है। श्याम पाहन कुंदन पाहन का बड़ा भाई है। उस पर पांच लाख रुपये का इनाम था। श्याम हरियाणा में मुर्गी फार्म चला रहा था।
कुंदन तड़पा-तड़पा कर मारने का आदि रहा है
कुंदन भाकपा माओवादी का जोनल कमांडर रहा है। उस पर हिंसा के कई मामले दर्ज हैं। किसी को बेरहमी से मारने में कुंदन को बहुत मजा आता था। उसकी मात्र एक अस्पष्ट फोटो पुलिस के पास है। कुंदन पर बुंडू विधायक रमेश सिंह मुंडा की हत्या, बुंडू डीएसपी प्रमोद कुमार समेत छह पुलिसकर्मियों की हत्या, आइसीआइसीआइ बैंक के 5.5 करोड़ रुपये और एक किलो सोने की लूट, सांसद सुनील महतो की हत्या, इंस्पेक्टर फ्रांसिस इंदवार की हत्या समेत कई मामलों में शामिल होने के आरोप है।
खूंटी में पीएलएफआइ के दो हार्डकोर धराये
खूंटी। पीएलएफआइ के दो हार्डकोर नक्सलियों मार्शल मुंडू उर्फ बुतरू और कैला होरो को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी तोरपा थाना के तपकारा अंतर्गत कालांसंड स्कूल के पास रोन्हे जानेवाली सड़क पर पुलिया के पास हुई। प्रेस कांफ्रेंस में एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा ने बताया कि सूचना मिली कि पीएलएफआइ के दो नक्सली किसी घटना को अंजाम देने के लिए तपकरा-तोरपा की ओर जानेवाले हैं। इस आलोक में एएसपी अभियान अनुराग राज के नेतृत्व में टीम गठित की गयी। इसमें तोरपा के थाना प्रभारी अमित कुमार तिवारी और तपकरा ओपी प्रभारी चंद्रशेखर आजाद के अलावा अन्य पुलिसकर्मियों और जवानों को शामिल किया गया। पुलिस रोन्हे रोड पर इंतजार करने लगी। उसी दौरान एक बाइक पर सवार अपराधी रोन्हे की ओर से आते दिखे। पुलिस को देखते ही वे पीछे घूम कर भागने लगे। पुलिस ने खदेड़ कर दोनों को पकड़ लिया। कैला तोरपा थाना के चंपाबाहा गांव का रहने वाला है, जबकि मार्शल मुंडू पश्चिमी सिंहभूम जिले के बंदगांव थाना के सारामोड़ा गांव का रहनेवाला है।
पास्टर सहित तीन लोगों की हत्या का आरोप : एसपी ने बताया कि कैला और मार्शल ने तीन अपै्रल 2017 को मुरहू थाना के तोनेर गांव में बिरसा पूर्ति और बांडेया मुंडा की हत्या कर दी थी। इसके अलावा दोनों उग्रवादियों ने 27 मार्च 2017 को तोरपा थाना क्षेत्र मेंडेवीड सोय की गोली मार कर हत्या कर दी थी। दोनों उग्रवादियों ने मुरहू थाना क्षेत्र के साड़ी गांव में जीइएल चर्च के पास्टर चामू सिंह पूर्ति की हत्या मोटरसाइकिल से खदेड़ कर कर दी थी। इसके अलावा तोरपा-मुरहू पथ पर सरिता कंस्ट्रक्शन कंपनी की गाड़ियों को जलाने में भी दोनों उग्रवादी शामिल थे। प्रेस कांफें्रस में एएसपी अभियान अनुराग राज, एसडीअपीओ रणवीर सिंह शामिल थे।
10 लाख का नक्सली आलोक गिरफ्तार
मेदिनीनगर। पलामू पुलिस ने भाकपा माओवादी के 10 लाख का इनामी नक्सली रामसुंदर राम उर्फ आलोक को गिरफ्तार किया है। उसकी गिरफ्तारी ऊंटारी रोड थाना क्षेत्र के जोगा गांव से हुई है। इस संबंध में डीआइजी विपुल शुक्ला ने पत्रकारों को बताया कि रामसुंदर राम उर्फ आलोक माओवादी संगठन से 1988 में जुड़ कर लगातार सक्रिय रहा है। वह बिहार झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी का सदस्य भी रहा है। इसके अलावा क्षेत्रों में एरिया कमांडर एवं जोनल कमांडर के पद पर भी रहा है। उन्होंने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने इसे गिरफ्तार किया। मौके पर एसपी इंद्रजीत माहथा भी मौजूद थे।
अजय राय विस्फोट कांड में भी था शामिल : डीआइजी विपुल शुक्ला ने बताया कि पलामू के छतरपुर में डीएसपी अजय राय विस्फोट कांड में भी यह शामिल रहा है। पहली बार 1999 में गढ़वा जेल गया और 2003 में जेल से बाहर आया। दो साल के बाद 2005 में वह पुन: संगठन में शामिल हो गया तथा 2008 में गढ़वा पुलिस द्वारा जेल भेजा गया। उन्होंने बताया कि इसका कार्य क्षेत्र बिहार, झारखंड के कई इलाकों में रहा है। मुख्य रूप से यह पलामू गढ़वा जिला एवं सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय रहा। सरकार ने इसकी गिरफ्तारी पर 10 लाख रुपये इनाम की घोषणा की थी। इसके विरुद्ध पलामू एवं गढ़वा जिले के विभिन्न थानों में लगभग 20 केस दर्ज हैं। गिरफ्तार माओवादी बिहार झारखंड मे स्पेशल एरिया कमेटी का सदस्य रह चुका है।