रांची: राज्य में अब वित्त वर्ष की शुरुआत अप्रैल महीने से न होकर जनवरी से होगी, इसके पीछे एक बड़ा कारण है। एक तो इसके पीछे इस अंग्रेजी व्यवस्था से निजात पानी है, तो दूसरा ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट का सही कैलकुलेशन (घरेलू उत्पादन का सही आकलन) कर पाना है। साथ ही इस व्यवस्था से बजट की राशि का समुचित खर्च हो पायेगा। हालांकि इसकी शुरुआत अगले साल से होनी है, लेकिन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सभी विभागों को स्पष्ट रूप से कह दिया है कि दिसंबर तक हर हाल में अपने अपने बजट की राशि खर्च कर लें। मतलब यह कि इस साल 12 महीने की जगह नौ महीने में ही बजट का सारा पैसा खर्च करना होगा। यही नहीं, इसी अवधि में रेवेन्यू कलेक्शन भी करना होगा, जो अपने आपमें एक टफ टास्क होगा।
मार्च में ही बजट पेश हो ऐसा कोई स्थापित नियम नहीं
दरअसल, सालाना बजट मार्च महीने में पेश हो और फाइनेंशियल इयर 1 अप्रैल से शुरू हो, इसका कोई स्थापित नियम नहीं है। अलग-अलग देशों में अलग-अलग व्यवस्था है। सभी विकसित देश अपने हिसाब से तय करते हैं, जैसे अमेरिका में फाइनेंशियल इयर सितंबर से अगस्त है।
अंग्रेजों के शासनकाल से चल रही थी व्यवस्था
भारत अंग्रेजों का उपनिवेश था और उस समय इंग्लैंड में बजट पेश होता था। वहां फाइनेंशियल इयर अप्रैल में शुरू होता था, तो वर्षों से अभी तक वही परंपरा चली आ रही थी। हालांकि इसे बदलने के लिए भी कई बार आवाज उठी लेकिन कदम आगे नहीं बढ़ा। केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार में इसे बल मिला।
अप्रैल से शुरू होनेवाले फाइनेंशियल इयर का सबसे बड़ा ड्रा बैक यह था कि दो तिमाही मतलब, लगभग छह महीना नॉन परफोर्मिंग जैसा होता था। अप्रैल से शुरू होने की वजह से स्कीम की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने जैसी प्रक्रिया में दो माह बीत जाता है। इसके बाद जून महीने से लेकर सितंबर तक बारिश का मौसम रहता है। ऐसे में खुले में होनेवाले काम या योजना पूरी नहीं हो पाती थी। इससे वहां से शुरू का दो क्वार्टर नॉन परफोर्मिंग माना जाता था। इसका असर यह भी पड़ता था कि बाकी की दो तिमाही में खर्च और राजस्व संग्रह पर काफी जोर होता था। यही वजह है कि ट्रेडिशन सिस्टम में फरवरी और मार्च के महीने में बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च होता आया है।
झारखंड में अब नया वित्तीय वर्ष जनवरी से
दिसंबर में पेश होगा बजट
बता दें कि झारखंड का इस वित्त वर्ष में लगभग 63 हजार करोड़ का बजट है, जिसका लगभग पांच से आठ प्रतिशत पैसा अलग-अलग विभागों द्वारा एक महीने में खर्च किया जा चुका है।