रांची: राजधानी से लेवी वसूलकर लौट रहे पीएलएफआइ के दो उग्रवादियों को पुलिस ने बिरसा चौक पर गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार उग्रवादियों में गगनप्रीत सिंह (24) वर्ष और मरकुस आइंद शामिल हैं। दोनों के पास से पुलिस ने एक होंडा सीबीआर बाइक, सात मोबाइल सेट, 13 सिम कार्ड, पीएलएफआइ का पर्चा पैड 05, नकद 45 हजार रुपये बरामद किया है।

रांची से मोबाइल खरीद कर लौट रहे थे उग्रवादी
प्रेस वार्ता के दौरान हटिया एएसपी ने बताया कि शुक्रवार सुबह 8:00 बजे बिसरा चौक पर वाहन चेकिंग की जा रही थी, तभी होंडा सीबीआर बाइक जेएच01एजेड 0349 से दो युवक वहां पहुंचे। दोनों पुलिस को देख भागने का प्रयास करने लगे। पुलिस ने काफी दूर तक दौड़ा कर घेराबंदी कर दोनों को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान दोनों ने खुद को पीएलएफआइ के गुमला चटकपुर के एरिया कमांडर ढुल्लू मुंडा का साथी बताया है।
मरकुस आइंद ने बताया कि खूंटी में ठेकेदारी का काम कर रहे शशि सिंह ने अपने स्टाफ अजय कुमार के माध्यम से लेवी के तौर पर 50 हजार रुपये गगनप्रीत को दिये थे। पैसों को गुमला में ढुल्लू मुंडा के पास पहुंचाना था। 50 हजार रुपयों में से पांच हजार रुपयों के मोबाइल और अन्य खर्च दोनों ने रांची में किया था, बाकि के 45 हजार रुपये, मोबाईल सेट और सिम लेकर दोनों ढुल्लू मुंडा को पहुंचाने जा रहे थे।

जोनल कमांडर के लिए काम करता है रांची का युवक
गिरफ्तार उग्रवादी 24 वर्षीय गगनप्रीत सिंह, पिता विजय प्रकाश रांची के स्टेशन रोड स्थित होटल एलिमेंट के बगल गली में रहता है। कुछ वर्षों पहले उसकी मुलाकात पीएलएफआइ के जोनल कमांडर तिलेश्वर गोप और एरिया कमांडर लारा टोपनो से हुई थी। दोनों ने गगनप्रीत को संगठन में शामिल कर उग्रवादियों तक सामान पहुंचाने और लेवी वसूलने का काम सौंपा था। वहीं मरकुस आइंद खूंटी का रहने वाला है। पुलिस ने मरकुस को पूर्व में लूटकांड के मामले में जेल भेजा था। जेल में उसकी दोस्ती पीएलएफआइ के उग्रवादियों से हुई थी। जेल से बाहर आने के बाद मरकुस पूरी तरह से संगठन के लिए लेवी वसूलने का काम करने लगा था।

उग्रवादियों के लिए सेफ जोन है रांची
रांची के बिरसा चौक पर लगातार नक्सली घटनाएं देखने को मिल रही हैं। हाल के दिनों में कई उग्रवादियों और नक्सलियों को पुलिस ने खूंटी जाने के दौरान बिरसा चौक से गिरफ्तार किया है। ऐसे तो पुलिस ने शुक्रवार को दो उग्रवादियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन ना जाने कई ऐसे उग्रवादी को रांची से लेवी वसूलकर और खरीदारी कर आसानी से लौट जा रहे हैं। ऐसे में पुलिस का नक्सलियों का रांची प्रवेश करने पर पूरी तरह अंकुश लगाना नामुमकीन प्रतीत होता है।

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