एजेंसी
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ कांग्रेस द्वारा आदर्श आचार संहिता को लेकर दाखिल नौ शिकायतों का निपटारा छह मई तक किया जाये। हालांकि, चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि उसने दो शिकायतों पर फैसला कर लिया है। सोमवार को पांचवें चरण का चुनाव देखते हुए उसे थोड़ा समय और दिया जाये। आयोग ने आठ मई तक का समय मांगा, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने आयोग की मांग खारिज करते हुए कहा कि आयोग के पास मोदी-शाह के खिलाफ दायर शिकायतों के निपटारे के लिए सोमवार तक पर्याप्त समय है।
सोमवार को आॅल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देब ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी देकर कहा था कि चुनाव आयोग, पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों को नहीं सुन रहा है। सुष्मिता देब ने कहा कि चुनाव आयोग की चुप्पी अप्रत्यक्ष रूप से चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का समर्थन करती है। सुष्मिता देब की अर्जी पर भी सोमवार को सुनवाई होगी।
इससे पहले चुनाव आयोग ने पीएम नरेंद्र मोदी के लातूर में दिये भाषण में भी कुछ गलत नहीं पाते हुए उन्हें क्लीन चिट दे दी है। पीएम ने पहली बार वोट करने वालों से पुलवामा के शहीदों और बालाकोट एयर स्ट्राइक के जांबाज सैनिकों के नाम पर वोट देने की अपील की थी। विपक्षी दलों की शिकायत के बाद आयोग ने जांच के आधार पर निष्कर्ष निकाला है कि 11 पेज के बयान में आचार संहिता के मानकों का उल्लंघन नजर नहीं आता है।

राहुल की नागरिकता पर विवाद की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार
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नयी दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की नागरिकता के बारे में फैसला होने तक उनके लोकसभा के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय में गुरुवार को एक याचिका दायर की गयी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष जय भगवान गोयल और सीपी त्यागी की इस याचिका का उल्लेख किया गया। पीठ ने कहा, हम इसे देखेंगे। इस याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा स्वेच्छा से ब्रिटेन की नागरिकता स्वीकार करने के सवाल पर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के नवंबर, 2015 के आवेदन बावजूद इस मामले में फैसला लेने में केंद्र और निर्वाचन आयोग की निष्क्रियता से असंतुष्ट हैं। गृह मंत्रालय ने हाल ही में राहुल गांधी को एक नोटिस देकर उनकी नागरिकता के बारे में शिकायत में उठाये गये सवाल पर एक पखवाड़े के भीतर तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस संबंध में गृह मंत्रालय और निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य पेश किये गये हैं और ऐसी स्थिति में राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी।
अधिवक्ता बरुण कुमार सिन्हा द्वारा दायर इस याचिका में राहुल गांधी की नागरिकता के बारे में निर्णय होने तक उनका नाम मतदाता सूची से हटाने का निर्देश निर्वाचन आयोग को देने का भी अनुरोध किया गया है। गृह मंत्रालय ने हाल ही में राहुल गांधी को भेजे पत्र में कहा था कि उसे स्वामी से प्रतिवेदन मिला है, जिसे उसके संज्ञान में लाया गया है कि बैकआॅप्स लिमिटेड नाम की एक कंपनी 2003 में ब्रिटेन में पंजीकृत थी, जिसमें राहुल गांधी एक निदेशक थे। गृह मंत्रालय ने कहा था कि स्वामी के पत्र में इस बात का भी जिक्र है कि 10 अक्टूबर, 2005 और 31 अक्टूबर, 2006 के ब्रिटिश कंपनी के वार्षिक रिटर्न में राहुल गांधी की जन्म तिथि 19 जून, 1970 दी गयी है और उनकी नागिरकता ब्रिटिश बतायी गयी है। अदालत में यह याचिका तब दाखिल की गयी है, जब मंगलवार 30 अप्रैल को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी को नोटिस जारी करते हुए 15 दिन में जवाब देने के लिए कहा है।
क्या होती है दोहरी नागरिकता
भारतीय संसद ने साल 2003 में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित कर विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान किया है। इसे ओवरसीज सिटीजनशिप आॅफ इंडिया के नाम दिया गया है, जिसे बोलचाल में दोहरी नागरिकता के नाम से जाना जाता है। इसके अनुसार, भारतीय मूल का कोई भी व्यक्ति जो संविधान लागू होने के बाद भारत या उसके किसी राज्य क्षेत्र का नागरिक रहा हो और जिसने पाकिस्तान और बांग्लादेश के अलावा किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण कर ली है, नागरिकता अधिनियम 1955 के अधीन पंजीकरण करा सकता है।

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