अजय शर्मा
रांची। झारखंड पुलिस एक्ट का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। इसमें कई बड़े अधिकार पुलिस अधिकारियों को मिलेंगे। क्षेत्रीय जोनल आइजी का पद पुनर्गठित किया जायेगा। सिविल सर्विस बोर्ड में भी संशोधन होगा। साथ ही राज्य सुरक्षा आयोग के गठन पर भी बल दिया गया है। तीन शहरों में पुलिस कमिश्नर की व्यवस्था होगी, जहां पुलिस अधिकारी को गोली चलाने के आदेश का अधिकार होगा। अभी फायरिंग का आदेश मजिस्ट्रेट देता है। एक्ट का पूरा रूप जब सामने आयेगा, तब झारखंड पुलिस नये शक्ल में दिखेगी। एक पुलिस अधिकारी का पदस्थापन कम से कम दो वर्षों के लिए होगा। सब कुछ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किया जा रहा है। पहले राज्य सरकार ने इस तरह का आदेश तो निकाला था, पर उसे अमल में नहीं लाया गया था। डीजीपी, एसपी, डीआइजी और थानेदार का कार्यकाल दो साल का होगा। विधि व्यवस्था और अनुसंधान के लिए अलग-अलग पुलिस अधिकारी तैनात किये जायेंगे।
राज्य सुरक्षा आयोग
प्रस्तावित पुलिस एक्ट के प्रारूप में आयोग के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। इसमें गृह मंत्री, मुख्य सचिव, नेता प्रतिपक्ष, गृह सचिव, डीजीपी सदस्य होंगे। वहीं, एडीजीपी रैंक का एक अधिकारी सदस्य सचिव होगा। इसमें राज्यपाल द्वारा मनोनीत तीन स्वतंत्र व्यक्ति होंगे। एक महिला सदस्य होना अनिवार्य होगा। राज्य सुरक्षा के लिए आयोग की बैठक हर माह होगी। मनोनीत सदस्य का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा।
पुलिस स्थापना पर्षद और सिविल सर्विस बोर्ड
प्रस्तावित एक्ट की धारा 83 के अंतर्गत पुलिस राज्य स्थापना पर्षद तथा सिविल सर्विसेज बोर्ड का प्रावधान है। सिविल सर्विस बोर्ड के अध्यक्ष भी मुख्यमंत्री होंगे। इसमें मुख्य सचिव, डीजीपी और एक एडीजीपी सदस्य होंगे।
लॉ एंड आॅर्डर और अनुसंधान के लिए अलग पुलिस
विधि व्यवस्था और अनुसंधान के लिए अलग अलग पुुलिस कर्मियों की नियुक्ति की जायेगी। यह व्यवस्था थाना स्तर पर होगी। हर थाना में दो प्रभारी होंगे। एक विधि व्यवस्था के और दूसरे अनुसंधान के। झारखंड पुलिस अनुसंधान के मामले में अन्य राज्यों से कमजोर है। इसे दुरुस्त करने के लिए यह व्यवस्था लागू की जायेगी।