अजय शर्मा

रांची। शूटर अमन साव को भगाने के लिए पुलिस ने ढाई करोड़ लिये थे? बड़कागांव थाना हाजत से फरार हुए शूटर अमन साव को झारखंड पुलिस अब तक नहीं पकड़ पायी। हद तो तब हो गयी, जब इसकी जांच की शुरूआत  हुई, तो उसकी आंच आइपीएस अधिकारियों तक पहुंचने लगी। बाद में जांच को ही बंद कर दिया गया। बड़कागांव हाजत से अपराधी सुशील श्रीवास्तव के शूटर अमन साव को भगानेवाले पुलिस अधिकारियों पर कई तरह के आरोप लगने लगे। यह भी चर्चा होने लगी कि भगाने के एवज में ढाई करोड़ लिये गये थे। 24 सितंबर 2019 को रामगढ़ जेल गेट से अमन साव को गिरफ्तार किया गया था। उसे बड़कागांव थाना हाजत में रखा गया था। 28 सितंबर को वह नाटकीय तरीके से भाग गया। स्थानीय एक नेता उसे खाना पहुंचाने जाते थे। अगर उस नेता से पूछताछ हो, तो कलई खुल सकती है।

क्या है आरोप

आरोप है कि अमन साव को कुछ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था। इसी वजह से उसे भगा दिया गया था। बड़कागांव थाना के पूर्व प्रभारी मुकेश कुमार को निलंबित किया गया। कुछ दिनों बाद उनका निलंबन वापस ले लिया गया था। अभी मुकेश विशेष शाखा में हैं।

गठित हुई थी टीम

फरार होने के बाद अमन साव रंगदारी मांगने लगा। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधिकारियों की एक लंबी टीम बनायी गयी। टीम के कुछ सदस्य नेपाल भी गये थे। बिहार में भी अमन साव के नजदीक पहुंच चुके थे। इस टीम में शामिल कुछ अधिकारी रामगढ़ जिला बल में रह चुके हैं, उन्हें भी रखा गया था। अमन को संरक्षण देनेवाले अधिकारी को जब पता चला कि अगर वह पकड़ा जाता है, तो पूरे मामले की कलई खुल जायेगी, तुरंत उन अधिकारियों को टीम से हटा दिया गया। नतीजा यह हुआ कि अब तक अमन पुलिस की पकड़ से बाहर है।

इमानदारी से जांच हो

अपराधियों को संरक्षण देने वाले पुलिस अफसर का पता लगाया जाना चाहिए। साथ ही किनके  कहने पर अमन की गिरफ्तारी के लिए गठित टीम में शामिल जूनियर अधिकारियों को बाहर किया गया, उसकी भी जांच होनी चाहिए। इस पूरे मामले की अगर जांच हुई, तो पुलिस और अपराधी गठजोड़ का खुलासा हो सकता है।

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