लॉकडाउन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग खोले जाने थे. सरकार द्वारा इसकी छूट दी गयी थी. वहीं इसे लेकर सरायकेला में कुछ व्यापारियों ने अधिकारियों द्वारा रिश्वत लिये जाने का आरोप लगाया गया था. जिसके बाद इस आरोप पर कार्रवाई करते हुए सरायकेला खरसावां डीसी अंजनेयुल दोड्डे ने एक क्लर्क को निलंबित कर दिया है, वहीं एडीसी सुबोध कुमार पर कार्रवाई के लिये कार्मिक विभाग से अनुशंसा की है.
व्यापारियों ने रिश्वत लेने का लगाया था आरोप
एडीसी के लिये विभाग को पत्र लिखते हुए डीसी ने सेवा बर्खास्त करने की अनुशंसा की है. लॉकडाउन दो के दौरान केंद्र सरकार ने कंपनियों को खोलने की अनुमति दी थी. जिसके लिये एडीसी सुबोध कुमार और कार्यपालक दंडाधिकारी पूनम कच्छप को नोडल पदाधिकारी बनाया गया था. इस दौरान व्यापारियों ने अधिकारियों की ओर से रिश्वत लेने का आरोप लगाया.
डीसी अंजनेयुल दोड्डे ने बताया की जानकारी मिलने के बाद इस पर कार्रवाई की गयी. वहीं कार्मिक विभाग से एडीसी को बर्खास्त करने की अनुशंसा की गयी है. इस जांच के बाद क्लर्क को निलंबित कर दिया गया है.
क्या है मामला
व्यापारियों ने आरोप लगाया कि एडीसी और सहायक ने कंपनियों को खोलने की अनुमति देने के लिए उपायुक्त के नाम पर रिश्वत की मांग की थी. कुछ कंपनियों ने मांग पूरी भी कर दी. वहीं कुछ कंपनियों ने विशेष सचिव से शिकायत कर दी. विशेष सचिव ने फोन पर डीसी से संपर्क किया और उन्हें मामले की जानकारी दी.जानकारी मिलने के बाद उपायुक्त ने जांच शुरू की तो पाया कि कई आवेदन नोडल पदाधिकारी पूनम कच्छप के पास प्रस्तुत किये बिना एडीसी ने खुद ही निष्पादित कर दिया है. जिससे नियमों की अनदेखी हुई है. इस पूरे मामले में क्लर्क की संलिप्तता भी पायी गयी.
मालूम हो कि केंद्र के आदेश के बाद लॉकडाउन 2.0 में यानि कि 15 अप्रैल के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग खोले जाने थे. राज्य में इसकी जिम्मेवारी जिला उपायुक्तों को दी गयी. उपायुक्तों की ओर से ही अधिकृत अधिकारी उद्योगों के लिये अनुमति दे सकते थे.
बीडीओ, सीओ और एसडीओ रह चुके हैं सुबोध कुमार
सुबोध कुमार पूर्वी सिंहभूम जिले में अपर जिला दंडाधिकारी रह चुके हैं. वे सरायकेला-खरसावां के खरसावां और पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर के बीडीओ, सीओ और एसडीओ रह चुके हैं. उन्होंने सितंबर 2019 में सरायकेला-खरसावां के अपर उपायुक्त का पदभार लिया था.