नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि क्या निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया जा सकता है। जस्टिस विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि दिल्ली में हम तीन न्यायिक अधिकारियों को कोरोना संक्रमण की वजह से खो चुके हैं।
यह याचिका दिल्ली जुडिशियल आफिसर्स एसोसिशएशन ने दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील दायन कृष्णन ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के लिए कोरोना के संबंध में सरकार की ओर से कोई उपाय नहीं किए गए हैं। दिल्ली के न्यायिक अधिकारी फंड इकट्ठा कर खुद ही कोविड सेंटर स्थापित कर रहे हैं। इस पर दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि तीन महीने में पूरी दिल्ली को वैक्सीन लगा दिया जाए। अगर केंद्र की ओर से पर्याप्त वैक्सीन मिल जाती है तो संभावित तीसरी लहर से संक्रमित होने के खतरे से बचा जा सकता है ।
राहुल मेहरा ने कहा कि अगर एक भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं है तो हम में से कोई भी सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हो या निचली अदालत का कोई व्यक्ति। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े हुए व्यक्तियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया जाना चाहिए। तब कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी, डॉक्टर आदि की तरह न्यायिक अधिकारियों को भी फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करना चाहिए।