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    Home»Breaking News»खतरे की घंटी है टीकाकरण के प्रति लापरवाही
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    खतरे की घंटी है टीकाकरण के प्रति लापरवाही

    azad sipahiBy azad sipahiMay 21, 2021No Comments5 Mins Read
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    लापरवाही : टीकाकरण केंद्रों पर भीड़ कहीं कोरोना स्प्रेडर न साबित हो जाये

    झारखंड को कोरोना की दूसरी लहर से राहत मिलने लगी है और इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव भी कम हो रहा है। नये संक्रमितों की संख्या कम होने के बाद अब सरकार ने तीसरी लहर से मुकाबले की तैयारी शुरू कर दी है। लेकिन उस तैयारी में एक बड़ा अवरोध टीकाकरण के प्रति राज्य में बरती जा रही लापरवाही और उदासीनता है। लोग या तो टीका लेना ही नहीं चाहते या फिर उन्हें इस महामारी की गंभीरता का अंदाजा नहीं है। एक तरफ जहां अब यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो चुका है कि टीका ही कोरोना से बचाव का सबसे प्रभावशाली हथियार है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है, वहीं कुछ लोग अब भी इसके प्रति अविश्वास जता रहे हैं। यह झारखंड के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। हालांकि इस उदासीनता और लापरवाही का कारण एक हद तक मनपसंद टीके की अनुपलब्धता और स्लॉट मिलने में हो रही देरी भी है। इसके अलावा टीकाकरण केंद्रों पर व्याप्त अव्यवस्था भी कुछ लोगों को वहां तक पहुंचने से हतोत्साहित कर रही है। इसलिए सरकार को अब टीकाकरण केंद्रों की संख्या बढ़ाने के साथ वहां की व्यवस्था को सुधारने की तरफ ध्यान देना चाहिए, ताकि लोग वहां तक जायें और टीका लगवा कर झारखंड में कोरोना की तीसरी लहर को कमजोर करने की लड़ाई में अपना योगदान दे सकें। झारखंड में चल रहे टीकाकरण की धीमी रफ्तार और लोगों की उदासीनता को रेखांकित करती आजाद सिपाही के टीकाकार राकेश सिंह की विशेष रिपोर्ट।

    कोकर के रहनेवाले संजीव और उनके घर के तीन सदस्य, जो 18 से 44 वर्ष आयुवर्ग में हैं, पिछले आठ दिन से टीका लगवाने के लिए स्लॉट बुक करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें कोवैक्सीन लेनी है, लेकिन उन्हें अब तक समय नहीं मिल पाया है, क्योंकि झारखंड में पर्याप्त मात्रा में यह टीका उपलब्ध नहीं है। दूसरी तरफ अपर बाजार के शैलेंद्र को जब रांची में कहीं कोई स्लॉट नहीं मिला, तो उन्होंने गुमला के बसिया में जाकर खुद और परिवार के दो अन्य सदस्यों को टीका लगवा लिया। इन कहानियों का तीसरा पहलू यह है कि अशोक नगर के विवेक और उनके परिवार के चार अन्य लोगों ने रजिस्ट्रेशन भी कराया, स्लॉट भी बुक कराया, समय पर टीकाकरण केंद्र पर गये भी, लेकिन वहां लगी भीड़ और अव्यवस्था देख कर लौट गये, क्योंकि वहां न सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा था और न ही अन्य सावधानी ही बरती जा रही थी।
    रांची की ये तीन कहानियां पूरी तरह सही हैं और आज झारखंड के 70 फीसदी युवा इनमें से किसी एक कहानी को खुद पर फिट कर सकते हैं। किसी को स्लॉट नहीं मिल रहा है, तो किसी को मनपसंद टीका नहीं मिल रहा और वे सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर टीका लगवाने के लिए विवश हैं। इसमें तीसरा वर्ग वह है, जिसे स्लॉट मिलता भी है, तो वह टीकाकरण केंद्र पर व्याप्त अव्यवस्था को देख कर लौट जाता है, क्योंकि वहां टीके के साथ उसे संक्रमण का उपहार मुफ्त में मिलने की आशंका रहती है। इनमें एक चौथा वर्ग भी है, जो इस अफवाह का शिकार है कि टीका लगाने से उसे तेज बुखार हो जायेगा, वह मर जायेगा या बीमार पड़ जायेगा या फिर उसे संक्रमण तो हो ही नहीं सकता।
    कोरोना की दूसरी लहर का जोर कम होने के बाद झारखंड सरकार ने अब इसकी तीसरी लहर से मुकाबले की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन इस मुकाबले के सबसे मजबूत हथियार, यानी टीकाकरण ही कमजोर हो रहा है। सरकार को इस मोर्चे पर अभी बहुत अधिक काम करना होगा। सबसे पहले तो लोगों के मन में बैठे अविश्वास के भूत को भगाना होगा और इसके लिए प्रचार-प्रसार के साथ टीका लगवाने के लिए उसे प्रोत्साहित करने का अभियान चलाने की जरूरत है। इस काम में समाज के हर वर्ग को, यहां तक कि गांवों में काम करनेवाले संगठनों तक को सक्रिय रूप से जोड़ना होगा। इसके बाद टीके की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी, ताकि लोगों को आसानी से मनपसंद टीका मिल सके। हालांकि यह सच है कि अपनी इच्छा के अनुसार टीका प्राप्त करना राज्य सरकार के नियंत्रण में नहीं है, यह पूरी तरह केंद्र पर निर्भर है कि किस राज्य को कितना और कब टीका मिलेगा, भले ही आर्डर और पैसा राज्य सरकार ने दिया है। लेकिन यह कोशिश तो की ही जा सकती है कि निर्माता कंपनियों पर दबाव बना कर टीके की पर्याप्त खेप हासिल कर ले। इस मोर्चे पर राज्य सरकार के नियंत्रण में जो काम है, उसमें टीकाककरण केंद्रों की संख्या बढ़ाना और उन केंद्रों पर व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है। इस तरफ तत्काल ध्यान दिये जाने की जरूरत है, ताकि लोगों को उनके घरों के आसपास ही टीका लगवाने की सुविधा मिल सके। इतना ही नहीं, आॅफलाइन रजिस्ट्रेशन और स्लॉट बुकिंग का तरीका भी अपनाया जा सकता है। टीकाकरण केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग जैसे प्रोटोकॉल का पालन कराना भी जरूरी है, वरना तीसरी लहर के हॉटस्पॉट के रूप में उनकी पहचान ही कायम हो जायेगी। एक भी केंद्र से यदि संक्रमण फैला, तो पूरा टीकाकरण अभियान ही खतरे में पड़ जायेगा।
    झारखंड सरकार और यहां के लोगों ने कोरोना की दूसरी लहर से मुकाबले में जो दम दिखाया है, उसे जारी रखने की जरूरत है, ताकि इस महामारी से राज्य को बचाया जा सके। इसके लिए टीकाकरण अभियान को मजबूती एक जरूरी शर्त है। अब यह संकल्प लेने का वक्त है कि हर हाल में झारखंड के प्रत्येक योग्य व्यक्ति को जल्द से जल्द टीका लग जाये, क्योंकि वैज्ञानिकों ने कह दिया है कि कोरोना को कमजोर करने का यह सबसे असरदार उपाय है।

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