– तूफान की गति बढ़ने पर उत्तर प्रदेश में तेज आंधी के साथ होगी बारिश
कानपुर। समुद्री गतिविधियों में बढ़ रही हलचल से इस साल का पहला चक्रवाती तूफान ‘मोचा’ सक्रिय होने को अग्रसर है। यह तूफान उत्तर प्रदेश में कहां तक असर डालेगा इस पर संशय बरकरार है। फिलहाल इसके जद में ओडिशा सहित तटीय राज्य और पूर्वोत्तर के राज्य आ सकते हैं। अगर गति बढ़ी तो उत्तर प्रदेश में भी इसका असर पड़ेगा और तेज आंधी के साथ बारिश होगी।
चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एस.एन. सुनील पाण्डेय ने गुरुवार को बताया कि मई के दूसरे सप्ताह में तूफान आने के आसार हैं। सप्ताह के अंत तक या फिर अगले महीने की शुरूआत में चक्रवाती तूफान की प्रबल आशंका है। इस चक्रवात का असर पूर्वी भारत से लेकर बांग्लादेश और म्यांमार तक रहने के आसार हैं। मौसम वैज्ञानिक कम दबाव में हो रहे बदलाव पर नजर बनाए हुए हैं। यदि यह चक्रवात सक्रिय होता है तो यह ‘मोचा’ नाम से जाना जाएगा। यमन ने बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवात का नाम ‘मोचा’ रखा है। 5 मई तक दक्षिण बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। यह और तीव्र होकर डिप्रेशन में बदल सकता है। हालांकि, यह चक्रवात में बदलेगा या नहीं, इस बारे में कोई साफ जानकारी नहीं है। कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद यह साफ हो जाएगा कि चक्रवात बनेगा या नहीं।
बताया कि इस कम दबाव के क्षेत्र का ओडिशा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र की सतह के गर्म तापमान से चक्रवात बन जाता है, इसलिए यह देखना होगा कि डिप्रेशन या अवसाद कैसे तीव्र होता है। साल 2022 में चक्रवात ‘असानी’ मई के पहले सप्ताह में बना था और मई के दूसरे सप्ताह में सिमट गया था। इसने मॉनसूनी हवाओं को अंडमान सागर में खींच लिया था, लेकिन ये इन्हें आगे नहीं खींच पाया। अभी तक अधिकतर चक्रवातों का गठन मई के महीने में होता देखा गया है। इससे पहले के वर्षों में भी इस माह में आसनी, तौकते और यास आदि चक्रवातों ने दस्तक दी थी। बंगाल की खाड़ी में चक्रवात आएगा या नहीं और इसके संभावित प्रकोप के बारे में अभी सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। रही बात उत्तर प्रदेश की तो इस तूफान की गति पर निर्भर करता है। अगर समुद्री हलचल से गति बढ़ी तो आंधी के साथ तेज बारिश की संभावना बढ़ जाएगा। फिलहाल उत्तर प्रदेश में मोचा चक्रवात के असर पर संशय बरकरार है और मौसम वैज्ञानिक बराबर नजर बनाये हुए हैं।