रांची। राजस्थान के कोटा में लड़कियों की खरीद-बिक्री के जिस कारोबार का खुलासा किया गया है, उसका संचालन झारखंड निवासी मां-बेटा कर रहे थे। बाल कल्याण समिति के सामने काउंसिलिंग में इसका खुलासा हुआ। मां-बेटा त्रिलोक चल मालपानी नामक व्यक्ति के कहने पर दलाल देवकीनंदन के जरिये गिरोह चला रहे थे। इसके बाद बाल कल्याण समिति ने इमेल के जरिये पुलिस में शिकायत की। इस पर उद्योग नगर पुलिस थाने में आरोपियों के खिलाफ धारा 363, 366, 370, 342 आइपीसी 81, 84 जेजे एक्ट में मुकदमा दर्ज किया। वहीं जांच के दौरान आरोपी गीता सिंह और देवकीनंदन को गिरफ्तार किया गया।
दीपिका नामक एक अन्य महिला को भी गिरफ्तार किया गया। गीता सिंह पति लाल बिहारी बोकारो जिले के कच्ची बस्ती की रहने वाली है। पुलिस को पूछताछ के बाद इस बात की जानकारी मिली है कि गीता सिंह करीब एक दर्जन बालिकाओं को खरीद कर उनकी शादियां करवाने का काम कर चुकी है। नाबालिग बालिकाओ को साड़ी पहनाकर, सजा कर शादी के नाम पर शारीरिक शोषण करवाया जाता था। फिर एक के बाद एक कई लोगों को शादी के नाम पर बेच देते थे। इस मामले में जुड़े अन्य गिरोह के सदस्यों की तलाश की जा रही है।
नानी घर जाने के लिए निकली दो लड़कियां पहुंच गयी गीता के पास
जानकारी के मुताबिक 7 मई को दो नाबालिग लड़कियां नानी घर जाने के लिये पटना स्टेशन पहुंचीण् लेकिन ट्रेन छूट गयी। वहां रौशम नामक व्यक्ति बहला-फुसलाकर उन्हें कोटा ले आया और कोटा प्रेम नगर अफोर्डेबल योजना के फ्लैट 714 में रहने वाली गीता के पास छोड़कर चला गया। 15 मई को दोनों किसी तरह सीडब्लूसी पहुंची, तब मामले का खुलासा हुआ। आरोपी इन लड़कियों को बीस-तीस हजार रुपये में खरीदते थे। दो से ढाई लाख रुपये में बेंच देते थे। बिहार, यूपी और झारखंड सहित अन्य राज्यों से गरीब नाबालिग बच्चियों की खरीद-बिक्री का खेल चल रहा था। बताया जा रहा है कि गीता सिंह इतनी रसूखदार है कि कई बार गिरफ्तार होने के बाद भी फिर से इस धंधे में लिप्त हो जाती थी।