नई दिल्ली। केरल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने शनिवार को नई दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला दिल्ली दौरा है। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से भेंट कर विभिन्न राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की।

दिल्ली पहुंचने के बाद सतीशन ने सबसे पहले कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल से उनके आवास पर मुलाकात की। इसके बाद वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पहुंचे, जहां खरगे ने उन्हें पारंपरिक पटका पहनाकर सम्मानित किया और मुख्यमंत्री बनने पर शुभकामनाएं दीं।

इसके बाद सतीशन ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से अलग-अलग मुलाकात की। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस दौरान केरल की राजनीतिक स्थिति, राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और पार्टी संगठन से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। कांग्रेस नेतृत्व ने सतीशन को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई देते हुए राज्य में सरकार के सफल संचालन की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री सतीशन ने कांग्रेस नेतृत्व को राज्य सरकार की शुरुआती योजनाओं और प्रशासनिक प्राथमिकताओं की भी जानकारी दी। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में केरल सरकार की कार्ययोजना और संगठनात्मक समन्वय को लेकर पार्टी नेतृत्व के साथ लगातार संवाद जारी रहेगा। इससे पहले सतीशन शुक्रवार देर रात दिल्ली पहुंचे और केरल भवन में ठहरे। उनके दिल्ली दौरे को कांग्रेस संगठन और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि वीडी सतीशन ने 18 मई को तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। वह केरल के 13वें मुख्यमंत्री बने हैं। उनके साथ 20 अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की थी। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे थे। इसके अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी तथा हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी समारोह में शामिल हुए थे।

केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की सरकार लगभग दस वर्षों बाद सत्ता में लौटी है। इस जीत को कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।

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