रांची। ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर घोटाले से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में आए अधिशाषी अभियंता सिद्धांत कुमार ने बुधवार को रांची सिविल कोर्ट स्थित पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के तुरंत बाद अदालत ने उन्हें राहत देते हुए सशर्त जमानत प्रदान कर दी।
अदालत ने जमानत देते हुए शर्तें लागू कीं, जिनमें एक लाख रुपये का निजी मुचलका, पासपोर्ट जमा करना तथा अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर न जाने का निर्देश शामिल है। इसके साथ ही उन्हें जांच एजेंसियों के साथ सहयोग बनाए रखने की भी अपेक्षा की गई है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। जांच एजेंसी के अनुसार, ठेके आवंटन में नियमों की अनदेखी, मिलीभगत और कमीशनखोरी के जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी को अंजाम दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
ईडी ने इस मामले में पहले ही कई अधिकारियों और ठेकेदारों को जांच के दायरे में लिया है। हाल ही में एजेंसी ने प्रमोद कुमार सहित कुल 14 आरोपितों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) दाखिल किया था, जिसके बाद अदालत ने सभी आरोपितों को समन जारी किया था। यह मामला नया नहीं है। ईडी ने वर्ष 2023 में पहली बार इस कथित घोटाले को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए कई इंजीनियरों और ठेकेदारों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए थे।
इसके बाद 6 मई 2024 को दूसरी बड़ी कार्रवाई की गई, जिसमें कई अभियंताओं और ठेकेदारों के परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि इस दौरान भी कई महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज और लेन-देन के सुराग मिले हैं, जिनका विश्लेषण जारी है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस मामले में कई अन्य आरोपित भी अदालत में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इनमें से अधिकांश को शर्तों के साथ जमानत मिल चुकी है। कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी आरोपितों से पूछताछ और दस्तावेजी जांच आगे बढ़ाई जा रही है। फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और ईडी द्वारा इसकी गहन छानबीन की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि टेंडर आवंटन प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर अनियमितताएं हुईं और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।



