भागलपुर। पूर्वी बिहार और सीमांचल की जीवनरेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त हो जाने से पूरे इलाके की व्यापारिक व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है। खासकर हरी सब्जी और केला कारोबार पर सबसे बुरा असर पड़ा है। भागलपुर हरी सब्जियों और केले का प्रमुख बाजार है, जहां गंगा पार से रोजाना भारी मात्रा में माल आता था। पुल टूटने के बाद यह आपूर्ति लगभग बंद हो गई है। पहले प्रतिदिन हजारों क्विंटल सब्जियां गंगा पार के इलाकों से भागलपुर मंडी पहुंचती थीं, लेकिन अब स्थिति बेहद खराब है। कई व्यापारी कम दामों पर गंगा पार ही अपनी उपज बेचने को मजबूर हो गए हैं।
नवगछिया के किसान भागलपुर के केले के सबसे बड़े सप्लायर थे। सुबह 6 बजे से साइकिल व अन्य वाहनों से केला लाने वाले व्यापारी अब पूरी तरह परेशान हैं। सब्जी कारोबारियों का कहना है कि भागलपुर उनका सबसे बड़ा बाजार था। सुबह 4 बजे तक सब्जियां पहुंच जाती थीं, जिससे छोटे व्यापारी आसानी से खरीदकर बिक्री कर पाते थे और अच्छे दाम मिलते थे। अब आवक बेहद कम हो गई है, जिससे बाजार में सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं।
4 मई 2026 की रात पिलर संख्या 133 के पास विक्रमशिला सेतु का हिस्सा टूटकर गंगा में समा गया था। इससे भागलपुर और नवगछिया के बीच सीधा संपर्क टूट गया। हरी सब्जी, केला और दूध की भारी किल्लत देखी जा रही है। पुल के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं और लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। माल समय पर न पहुंचने से कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ गई है। जिलाधिकारी ने माल ढुलाई के लिए बड़े मालवाहक जहाज (स्टीमर) की व्यवस्था करने की योजना बनाई है, ताकि सब्जी और अन्य जरूरी सामानों की कमी को कम किया जा सके। पुल को पूरी तरह चालू होने में 3-4 महीने का समय लग सकता है। प्रशासन ने लोगों को मुंगेर रूट या नाव से यात्रा करने की सलाह दी है।



