कोरोना के खिलाफ जारी संघर्ष में गोरखपुर स्थित बाबा राघवदास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा होने के बाद दो ऐसी सफलताएं सामने आईं हैं, जिनसे न केवल कोरोना मरीजों और उनके परिजनों में जीत भावना बलवती हुई है, बल्कि चिकित्सकों का भी उत्साह बढ़ा है। यह उपलब्धि ऐसे समय में मिली है, जब मरीजों का इलाज कर रहे चिकित्सकों और कर्मचारियों को भी इससे ग्रसित पाया जा रहा है।
किसी भी मरीज के इलाज में चिकित्सकों के सकारात्मक प्रयास के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का अहम रोल है। इनकी व्यवस्था में आगे कदम बढ़ा रही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की कोशिशें रंग अब रंग लाने लगी हैं। गोरखपुर में दो ऐसे केस समाने आये हैं, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद बाबा राघवदास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों और कर्मचारियों में उत्साह का संचार हो गया है। लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या को इग्नोर कर सकारात्मक पहलू देखने की दृष्टि आ गई है।
इन मरीजों का हाल जानते रहे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री योगी के गृह नगर गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में महज 03 माह की बच्ची और 49 वर्ष के प्रौढ़ मरीज ने कोरोना को मात देने में सफलता पाई है। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के बाद यह दोनों मरीज स्वस्थ होकर अपने घर पहुंच गए हैं। जब तक यह मरीज बीआरडी में भर्ती रहे मुख्यमंत्री खुद वहां के वीसी से बात कर इनका हाल जानते रहे हैं। इधर, बीआरडी के प्राचार्य डॉ गणेश भी काफी उत्साहित हैं। जिनका कहना है कि इन दो मामलों ने चिकित्सा विभाग के सभी चिकित्सक और कर्मचारियों में उम्मीद की किरण जगाई है। सभी दोगुने उत्साह से मरीजों का इलाज व देखरेख करने में जुटे हैं।
पहला मामला : जिस बीमारी का दिखा लक्षण, उसी का शुरू कर दिया इलाज
गोरखपुर के गोला तहसील निवासी बाबूलाल को कार्डियक अरेस्ट होने पर दिल्ली के सफदजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वह ठीक हो गया। उसका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव निकलने का बाद भी सफदरजंग के डॉक्टर्स ने डिस्चार्ज कर दिया। मरीज के परिजन उसे लेकर घर आए। सांस लेने में उसे समस्या हुई। फिर बीआरडी पहुंचे। यहाँ उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद शुरू हुए इलाज पहले डॉक्टर्स टेंड्र के अनुसार इलाज होता रहा। जिस बीमारी के लक्षण दिखते उसकी दवा तुरत शूरू हो जाती। डॉक्टर्स ने मरीज के खान-पान, साफ-सफाई, लक्षण के अनुसार दवा और प्रॉपर मॉनिटरिंग की। जिसकी वजह से बाबूलाल एक माह में कोरोना को हराने में सफल रहा।
प्रशिक्षण ले दूध पिलाती रही मां
बस्ती जिले की रहने वाली अरहम नाम की तीन माह की बच्ची को बुखार होने पर उसके माता पिता बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले आये थे। बच्ची के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स ने बच्ची को ऑब्जर्वेशन में रखा और बच्ची की मां को खुद को बचाते हुए बच्ची को दूध पिलाने और उसकी देखरेख करने की ट्रेनिंग दी। मां को अच्छी डाइट लेने की सलाह दी। बच्ची के भर्ती वाले स्थान की साफ-सफाई और टेम्परेचर का विशेष ध्यान दिया गया। बच्ची को सेंकड्री इन्फेक्शन न हो डॉक्टर्स इस पर भी नजर बनाए हुए थे। जिसका नतीजा रहा कि बच्ची 14 दिन में कोरोना से जंग जीतने में सफल रही।
बता दें कि सबसे बड़ी आबादी वाले उत्तर प्रदेश में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताया जा रहा है। दरअसल, कोरोना की शुरुआत से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर फोकस करना शुरू कर दिया था। अब प्रदेश में हर रोज 15000 टेस्ट हो रहे हैं। इसका ही असर माना जा रहा है कि टेस्ट होने का आंकड़ा 04 लाख को पार कर चुका है। लैब के साथ ही यूपी के हर जिला अस्पताल में ट्रू नेट मशीनें पहुंचने से भी टेस्ट करने में तेजी आई है।