रांची। धनबाद के चर्चित गांजा प्लॉट कांड में सीआइडी ने अनुसंधान के बाद साजिश रचने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जो लोग गिरफ्तार किये गये हैं, उनमें कतरास के नीरज कुमार तिवारी, तेतुलमारी के रवि कुमार ठाकुर और सुनील कुमार चौधरी शामिल हैं। फर्जी गांजा बरामदगी मामले में निरसा थाना में मामला दर्ज है। यह मामला 25 अगस्त 2019 को दर्ज कराया गया। सीआइडी ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इन तीनों को गिरफ्तार किया। नीरज तिवारी धनबाद के पूर्व एसएसपी के लिए कार्य करता था। दो अन्य सुनील चौधरी और रवि ठाकुर नीरज तिवारी के लिए काम करते थे। इन तीनों को गांजा बरामदगी के समय घटनास्थल पर देखा गया था। इस मामले में एक निर्दोष युवक इसीएलकर्मी चिरंजीत घोष को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बगैर जांच किये चिरंजीत को जेल भेजा गया था।
क्या मिला साक्ष्य
सीआइडी के अनुसंधान में सच सामने आ चुका है। पूरी तरह से यह मामला कुछ पुलिस अधिकारियों और कोयला तस्करों के गंठजोड़ का परिणाम है। इनका नेटवर्क इतना बड़ा था कि पुलिस की नीयत चिरंजीत को सिर्फ फर्जी केस में फंसाना था। पुलिस के कुछ अधिकारी चाहते थे कि उसे सजा हो। इस मामले में इसलिए टीआइ परेड कराने की तैयारी भी की गयी थी। कोर्ट ने यह कहते हुए टीआइ परेड की इजाजत नहीं दी और न ही 164 के बयान दर्ज करने की अनुमति कि इस मामले में जब पुलिस ने एफआइआर किया है, तो इसकी जरूरत नहीं है। सीआइडी ने पाया है कि जिस कथित सूचक की बात सामने आ रही है, उससे उस समय के थाना प्रभारी उमेश कुमार प्रसाद और तत्कालीन एसएसपी कौशल किशोर से फोन पर बात भी हुई है। यह भी पता चल गया है कि जिस गाड़ी से 39 किलो गांजा बरामद करने का दावा पुलिस ने किया है, वह वाहन किसी और का है। साथ ही चिरंजीत घोष का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।