बाघमुंडी सीट पर आये नतीजों से बढ़ा पार्टी का उत्साह
दयानंद राय
रांची। 2019 का विधानसभा चुनाव 53 सीटों पर अकेले लड़नेवाली आजसू पार्टी अब बंगाल और ओड़िशा के आदिवासी बहुुल इलाकों में पैर पसारना चाहती है। पश्चिम बंगाल चुनाव और खासकर बाघमुंडी सीट पर आये नतीजे से पार्टी उत्साहित है और यही कारण है कि बंगाल के जंगलमहल और ओड़िशा के आदिवासी बहुल इलाके में जनाधार को विस्तार देने के लिए पार्टी कमर कस चुकी है।

पार्टी प्रत्याशी को मिले थे 61936 वोट
बंगाल की बाघमुंडी विधानसभा सीट पर आजसू प्रत्याशी आशुतोष महतो को 61936 वोट मिले थे। चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार सुशांत महतो जीते थे, जबकि आजसू के आशुतोष महतो दूसरे स्थान पर रहे थे। आशुतोष महतो की जीत के लिए आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने पूरी ताकत लगायी थी। चुनाव से पहले बाघमुंडी के लहरिया में पार्टी के विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में सुदेश ने कहा था कि चुनाव लड़ना हमारा मकसद नहीं है। पुरुलिया को पिछड़ेपन से आजाद करना हमारी प्राथमिकता है।

मानभूम जंगलमहल स्थानीय प्रशासन की मांग को समर्थन मिला
आजसू के केंंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत ने बताया कि बंगाल और ओड़िशा के आदिवासी बहुल इलाकों में पार्टी विस्तार की संभावनाएं देखती है। पार्टी ने बंगाल चुनाव से पहले मानभूम जंगलमहल स्थानीय प्रशासन की मांग की थी। इसके अच्छे नतीजे आये हैं। केवल जंगलमहल इलाके में 43 विधानसभा सीटें आती हैं। झारखंड की कुल विधानसभा सीटों की तुलना में यह आधी से ज्यादा हैं। ऐसे में यहां विस्तार की संभावनाएं हैं। यही नहीं, ओड़िशा के आदिवासी बहुल झारखंड से सटे इलाके मयूरभंज, क्योंझर और सुंदरगढ़ में भी विस्तार की संभावनाएं हैं। इसलिए इन इलाकों को फोकस करके पार्टी यहां कार्यक्रम करेगी और यहां की जनता की आवाज बनेगी। उन्होंने कहा कि मानभूम जंगलमहल स्थानीय प्रशासन की मांग आजसू ने उठायी थी और अब इसे भाजपा उठा रही है। जाहिर तौर पर यह राष्टÑीय मुद्दा बनेगा और लोग इससे और ज्यादा कनेक्ट होंगे।

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