8000 कर्मियों को राहत, प्रबंधन का पावर सीज!
15 साल की सेवा के बाद बीएड की अनिवार्यता खत्म
दो साल सेवा के बाद स्थायी माने जायेंगे शिक्षाकर्मी
60 साल में होंगे रिटायर, अवैतनिक छुट्टी का भी प्रावधान
राजीव
झारखंड में पहली बार 20 साल के बाद इंटर कॉलेजों को नियमावली की सौगात सीएम हेमंत सोरेन देनेवाले हैं। नियमावली बन जाने से जहां एक ओर कॉलेज प्रबंधन की दबंगई खत्म हो जायेगी, वहीं कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। नियमावली में कॉलेज के शासी निकाय के द्वारा की जानेवाली नियुक्ति और कार्रवाई के पावर को भी सीज कर दिया गया है। इसमें स्पष्ट है कि 15 साल की सेवा के बाद शिक्षकों को बीएड की अनिवार्यता खत्म हो जायेगी। साथ ही दो साल की सेवा के बाद शिक्षक स्वत: स्थायी माने जायेंगे। शिक्षाकर्मियों को 60 साल में रिटायरमेंट की उम्रसीमा निर्धारित की गयी है। वहीं अवैतनिक समेत अन्य तरह के अवकाश का भी प्रावधान किया गया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इस बाबत प्रस्ताव तैयार किया है। अब यह प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जायेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह लागू हो जायेगा। सीएम के निर्देश के बाद इंटर कॉलेज की नियुक्ति नियमावली झारखंड एकेडमिक कौंसिल ने बना कर विभाग को भेजा है। इस पर विभाग की ओर से आपत्ति भी मंगा ली गयी है। नियमावली बन जाने पर झारखंड के 330 इंटर कॉलेजों के शिक्षाकर्मी राहत की सांस लेंगे। इसमें 200 स्थायी प्रस्वीकृति प्राप्त इंटर कॉलेज हैं, तो 130 स्थापनानुमति प्राप्त इंटर कॉलेज शामिल हैं। नियमावली नहीं होने से करीब आठ हजार शिक्षाकर्मी प्रबंधन की दबंगई का शिकार हो रहे हैं।
- नियमावली में क्या है खास
- नियुक्ति के लिए होनेवाले साक्षात्कार में आरडीडीइ, जैक प्रतिनिधि भी होंगे। इसमें तीन नाम का पैनल शासी
- निकाय भेजेगा। साथ ही इस पैनल में एक महिला और एक एससी-एसटी का नाम भी होना चाहिए।
- नियुक्ति का अनुमोदन झारखंड एकेडमिक कौंसिल करेगा
- 15 दिनों तक अगर जैक नियुक्ति का अनुमोदन कर सूचना नहीं देता है, तो यह नियुक्ति स्वत: रद्द समझी जायेगी।
- 15 साल की सेवा के बाद बीएड की अनिवार्यता नहीं रहेगी।
- लापरवाही पर दंड के लिए जैक से अनुमोदन लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
- नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी करना अनिवार्य कर दिया गया है।
- शिक्षाकर्मियों के लिए आकस्मिक, अर्जित, अवैतनिक, मातृत्व, विशेष अवकाश की व्यवस्था की गयी है।