टाटा समूह के संस्थापक और जमशेदपुर को नयी पहचान देनेवाले जमशेदजी नौसरवान जी टाटा को सदी का सबसे बड़ा परोपकारी का सम्मान दिया गया है। उनके द्वारा स्थापित टाटा उद्योग समूह भारत का सबसे विश्वसनीय और ताकतवर ब्रांड है, जो एक आम भारतीय के दैनिक जीवन में किसी न किसी रूप में जुड़ा है। मोबाइल के अलावा हर क्षेत्र में टाटा समूह की दमदार उपस्थिति है। ब्लेड से लेकर पानी के जहाज के पुर्जे बनानेवाले इस उद्योग समूह की इस्पात कंपनी टाटा स्टील का सूत्रवाक्य ही इसकी स्थापना और अपने संस्थापक को मिले सम्मान का प्रतीक है। कंपनी अपने सूत्रवाक्य में कहती है, हम इस्पात भी बनाते हैं।
जेएन टाटा को सदी का सबसे बड़ा दानवीर और परोपकारी बताते हुए हुरुन रिपोर्ट और एडेलगिव फाउंडेशन ने कहा है कि अपने जीवन काल में उन्होंने कुल 102 अरब डॉलर का दान दिया, जो आज तक किसी दूसरे उद्योगपति ने नहीं दिया है। उनके आगे तो बिल और मेलिंडा गेट्स तक फीके हैं। रिपोर्ट में दुनिया भर के करीब 50 परोपकारियों के नाम शामिल हैं। माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स और उनकी पूर्व पत्नी मेलिंडा गेट्स 74.6 अरब डॉलर दान कर दूसरे स्थान पर हैं, तो वहीं वॉरेन बफे 37.4 अरब डॉलर का दान कर तीसरे स्थान पर हैं।
टाटा समूह के संस्थापक को मिला यह सम्मान यूं ही नहीं है। इससे दुनिया भर में भारत की अलग किस्म की छवि बनी है। इस सम्मान के हकदार सचमुच जेएन टाटा ही थे, क्योंकि पूरा टाटा उद्योग समूह आज भी अपनी कमाई का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा परोपकार में ही खर्च करता है। जेएन टाटा के वंशज और टाटा समूह के निवर्तमान अध्यक्ष रतन टाटा ने उद्योग समूह की इस परंपरा को शानदार ढंग से आगे बढ़ाया है। समूह के वर्तमान अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन हालांकि टाटा परिवार में पैदा नहीं हुए, लेकिन उन्होंने इस परंपरा को बरकरार रखा है। इसलिए टाटा को आज भी भारत का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित उद्योग समूह का दर्जा मिला हुआ है। रतन टाटा ने एक साक्षात्कार में कहा था, हम दुनिया का सबसे अमीर घराना नहीं बन सकते, क्योंकि हम उद्योगपति हैं, व्यापारी नहीं। सचमुच टाटा समूह के आदर्श पुरुष श्रद्धा और इस तरह के सम्मान के सर्वथा योग्य हैं।
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