– नौसेना डॉकयार्ड विशाखापट्टनम से कैम रैन बे बंदरगाह के लिए भेजा गया
– अधिकारियों, कर्मियों ने औपचारिक समारोह में जहाज को अंतिम विदाई दी
नई दिल्ली। वियतनाम को उपहार में दी गई स्वदेश निर्मित मिसाइल कार्वेट आईएनएस कृपाण बुधवार को नौसेना डॉकयार्ड विशाखापट्टनम से समुद्र के रास्ते कैम रैन बे के लिए रवाना कर दी गई। भेजने से पहले मिसाइल कार्वेट से भारतीय नौसेना का ध्वज उतारा गया। पूर्वी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ वाइस एडमिरल संजय वात्सायन के नेतृत्व में अधिकारियों और कर्मियों ने एक औपचारिक समारोह में जहाज को विदाई दी।
स्वदेश निर्मित खुखरी श्रेणी की मिसाइल कार्वेट आईएनएस कृपाण 12 जनवरी, 1991 को भारतीय नौसेना में शामिल हुई थी और देश को 32 साल तक शानदार सेवा दी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 19 जून को भारत यात्रा पर आये वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान गैंग के साथ द्विपक्षीय बातचीत के बाद मिसाइल कार्वेट को उपहार में देने का ऐलान किया था। यह मध्यम और करीबी दूरी की बंदूकें, लांचर और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों से सुसज्जित है। यह सतह पर युद्ध, तटीय और अपतटीय गश्त, तटीय सुरक्षा, समुद्री डकैती रोधी और विभिन्न प्रकार की भूमिकाएं निभाने में सक्षम है।
वियतनाम को उपहार में दिया गया युद्धपोत आईएनएस कृपाण मिसाइल जलपोत के खुखरी वर्ग का तीसरा जहाज है और इसका निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने किया था। यह एक मध्यम आकार का युद्धपोत है, जिसके शस्त्रागार में सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, एक मध्यम दूरी की बंदूक, एंटी एयरक्राफ्ट शोल्डर-लॉन्च मिसाइल और क्लोज इन वेपन सिस्टम शामिल हैं। जहाज सतह और हवाई निगरानी राडार के साथ-साथ बंदूकों के लिए अग्नि नियंत्रण राडार से लैस है। इसमें लगी मिसाइल 85 किमी. तक के लक्ष्य को भेद सकती है, जबकि इसकी दो 30 मिमी एके 630 एंटी-एयरक्राफ्ट गन 15 किमी. की रेंज में प्रति मिनट 5000 राउंड फायर कर सकती है।
भारतीय नौसेना से वियतनाम पीपुल्स नेवी को स्वदेशी रूप से निर्मित इन-सर्विस मिसाइल कार्वेट आईएनएस कृपाण का स्थानांतरण उनकी क्षमता को बढ़ाने में समान विचारधारा वाले भागीदारों की सहायता करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आईएनएस कृपाण का वियतनाम में स्थानांतरण भारत के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है। यह भारत से किसी भी मित्रवत देश को पूरी तरह से परिचालन कार्वेट उपहार में देने का पहला अवसर है। भारत और वियतनाम ऐतिहासिक संबंध साझा करते हैं और मौजूदा संबंध मजबूत, बहुआयामी और सांस्कृतिक और आर्थिक स्तंभों पर आधारित हैं।