रांची। झारखंड सरकार स्कूल चलें हम का नारा लगा रही है, लेकिन आलम यह है कि कंप्यूटर शिक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। झारखंड के 3246 स्कूलों में कंप्यूटर की पढ़ाई कराने की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को दी गयी है। इस परियोजना के संचालन की जिम्मेवारी झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की है। जानकारी के अनुसार 2018 से सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा को चरणबद्ध तरीके से देने की शुरूआत की गयी थी, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी इसका सिलेबस तैयार नहीं किया गया।
2023-24 में 1821 स्कूलों में नया लैब स्थापित किया गया है। सत्र 2023-24 में स्वीकृत 1821 में से 1274 प्राथमिक विद्यालय और 43 माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इसके अलावा 2022.23 के लिए प्रारंभिक स्कूलो में स्वीकृत 221 और 283 माध्यमिक स्कूलों में लैब स्थापित की गयी। जिन स्कूलों में आइसीटी लैब बनाये गये हैं। वहां इंटरनेट सुविधा भी बहाल करनी थी। वर्तमान में राज्यभर में 35,443 स्कूलों में से 2,976 स्कूल इंटरनेट कनेक्टिविटी से लैस है। जानकारी के मुताबिक राज्य में आइसीटी लैब का संचालन करने वाली कंपनियों में बीसीसीएल, एकस्टर मार्स, मिलेनियम, हिटाची, एमजीआरएम, स्कूल नेट इंडिया लिमिटेड और टीसीआईएल जैसी नामी कंपनीयां है। लेकिन बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा देने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ती हो रही है। कंप्यूटर की शिक्षा देने वाली कंपनियों को स्कूलों में आइसीटी लैब की स्थापना और बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए झारखंड शिक्षा परियोजना कंपनियों को एक मोटी रकम दे रही है। इसके बाद भी बिना सिलेबस के ही बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा देने के नाम पर सालो से खानापूर्ति की जा रही है। 2023-24 तक कंप्यूटर शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों का मूल्यांकन नहीं किया गया।