पश्चिमी सिंहभूम। पश्चिमी सिंहभूम जिले के किरीबुरू-मेघाहातुबुरु क्षेत्र में मंगलवार को धरती आबा बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक एकता के साथ मनाई गई। आदिवासी कल्याण केंद्र किरीबुरू-मेघाहातुबुरु-प्रॉस्पेक्टिंग एवं आदिवासी सरना समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने भाग लेकर महान जननायक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना और प्रार्थना गीतों के साथ हुई। समाज के दियूरी पांडू कोंगाड़ी, जयराम पाट पिंगुआ, धनुर्जय लागुरी, लोदरो स्वासी और बुद्धआ कोंगाड़ी ने सामूहिक रूप से पूजा संपन्न कर समाज की सुख-समृद्धि और एकता की कामना की। पारंपरिक अनुष्ठान के बाद उपस्थित लोगों ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके संघर्षों और बलिदान को स्मरण किया।

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों के प्रतीक हैं। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आदिवासी समाज को संगठित किया और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ ऐतिहासिक “उलगुलान” आंदोलन का नेतृत्व किया। उनके संघर्ष ने शोषण और अन्याय के खिलाफ जनचेतना की ऐसी अलख जगाई, जिसकी गूंज आज भी समाज में सुनाई देती है।

इस अवसर पर किरीबुरू के सीजीएम पी.एम. शिरपुरकर, मेघाहातुबुरु के प्रभारी महाप्रबंधक संजय कुमार सिंह, किरीबुरू एसडीपीओ विनीत कुमार किंडो, थाना प्रभारी रोहित कुमार, मुखिया पार्वती कीड़ो, मुखिया प्रफ्फुलित ग्लोरिया टोपनो, मुखिया लिपि मुंडा, मजदूर नेता अफताब आलम समेत कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, सेल अधिकारी-कर्मचारी और विभिन्न संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में रोयाराम चांपिया, अमर सिंह सुंडी, गोपी लागुरी, बीर सिंह मुंडा, श्याम बिरुआ, सर्गेया अंगारिया, बलभद्र बिरूली, कन्हाई बिरुआ, बीरबल गुड़िया, एस. होरो, संदीप तीयू, माधव चंद्र कोड़ा, आर.के. सिंकू, दामोदर बारी, दशरथ लागुरी, बिलाइची पूर्ति, गीता लागुरी, बसंती हेंब्रम, नीतिमा पूर्ति, मीनाक्षी और राजेश मुंडा सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर धरती आबा को नमन किया।

सभा में वक्ताओं ने युवाओं से बिरसा मुंडा के आदर्शों को अपनाने और समाज के विकास, शिक्षा तथा अपने अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मात्र 25 वर्ष की आयु में बिरसा मुंडा ने जो चेतना जगाई, वह आज भी देशभर के आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। उनकी पुण्यतिथि केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि उनके विचारों और संघर्षों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का दिन भी है।

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