रांची। जेपीएससी एक बार फिर विवादों में आ गया है। दरअसल 18 जुलाई को कमीशन ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया, लेकिन उसमें आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया गया। राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में होने वाली इस भर्ती के लिए संबंधित विषय में न्यूनतम 55 फीसदी अंक के साथ स्नातकोत्तर, साथ ही नेशनल इलीजिबिलिटी टेस्ट (नेट) या झारखंड इलीजिबिलिटी टेस्ट (जेट) में उत्तीर्ण होना अनिवार्य योग्यता रखी गयी है। इससे कॉलेजों के लिए बैकलॉग और रेगुलर वेकेंसी को भरा जाना है। मगर आरक्षित पद को लेकर अभी से सवाल उठने लगे हैं। नाराज अभ्यर्थियों का मानना है कि एक तो राज्य में 2007 के बाद जेट की परीक्षा नहीं हुई है, जिससे छात्र परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर आरक्षण के मापदंड की भी आयोग ने अनदेखी कर विज्ञापन प्रकाशित किया है। इसके विरोध में अभ्यर्थियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है।
सुधार नहीं हुआ, तो नहीं होने देंगे नियुक्ति: अभ्यर्थी
सहायक प्राध्यापक (अनुबंध) संघ के अध्यक्ष निरंजन महतो ने कहा कि जब तक जेपीएससी और झारखंड सरकार द्वारा उपरोक्त त्रुटियों में सुधार नहीं किया जाता, तब तक कोई नियुक्ति नहीं होने दी जायेगी। बता दें कि जेपीएससी द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर के 1118 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया है।
छात्रों ने इन बिंदुओं पर सवाल खड़े किये
1. रिक्तियों में आरक्षण रोस्टर का पूर्णत: पालन नहीं
2. बैकलॉग रिक्ति में भी त्रुटि
3. रिक्तियां पुरानी हैं, राज्य गठन के पूर्व की है,जबकि बहाली 2009 एवं राज्य सरकार नियम – 2017 के अनुसार की जा रही है। रिक्तियां पुरानी हैं, तो नियम भी पुराना होना चाहिए।
4. जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा विभाग की रिक्तियों में भारी त्रुटि है।
5. असिस्टेंट प्रोफेसर के बैकलॉग पदों में दिव्यांगों के लिए पद नहीं होने पर सवाल
6. नियमित नियुक्ति के पदों में भी लो विजन के दिव्यांगों के लिए पद तो हैं, लेकिन शारीरिक एवं श्रव्य दिव्यांग के लिए पद नहीं हैं।