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    Home»राजनीति»असम का फैसला राजीव गांधी का था, वे अमल की हिम्मत नहीं कर पाये: शाह
    राजनीति

    असम का फैसला राजीव गांधी का था, वे अमल की हिम्मत नहीं कर पाये: शाह

    azad sipahiBy azad sipahiJuly 31, 2018No Comments3 Mins Read
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    नई दिल्ली. असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के एक बयान पर मंगलवार को राज्यसभा में हंगामा हो गया। शाह ने कहा, ‘‘किसी के पास घुसपैठियों की पहचान करने की हिम्मत नहीं थी। राजीव गांधी ने 1985 में असम समझौते पर दस्तखत किए थे। यह एनआरसी जैसा था। समझौते में कहा गया था कि अवैध घुसपैठियों की पहचान कर हमारे सिटीजन रजिस्टर से अलग करना चाहिए। लेकिन वे अमल करने की हिम्मत नहीं कर पाए। हम में अमल करने की हिम्मत है, इसलिए हम यह कर रहे हैं। एनआरसी का काम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहा है।’’ शाह के इस बयान पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी समेत विपक्ष के सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी।
    एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट सोमवार को जारी हुआ था। इसके मुताबिक 3.39 करोड़ में से 2.89 करोड़ लोगों को नागरिकता के लिए योग्य पाया गया। 40 लाख लोगों के नाम इस लिस्ट में नहीं हैं। जो नाम छूट गए हैं, उनमें भाजपा और एआईयूडीएफ का एक-एक विधायक शामिल है। गृह मंत्रालय का कहना है कि ये ड्राफ्ट है, फाइनल लिस्ट नहीं। जो भी नाम छूट गए हैं, वे विदेशी नहीं कहलाएंगे। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं होगी।

    शाह ने कहा- असम समझौते की आत्मा में एनआरसी था :

    शाह ने कहा, ‘‘किसी ने एनआरसी का मूल कहां है, ये नहीं देखा। इसकी भी चर्चा इस सदन में होनी चाहिए। असम के अंदर जो समस्या हुई थी, उसे लेकर बड़ा आंदोलन हुआ। सैकड़ों छात्र शहीद हुए। आंदोलन काबू के बाहर गया तो तब के प्रधानमंत्री (राजीव गांधी) ने 14 अगस्त को 1985 को असम समझौता किया और 15 अगस्त को लाल किले से इसे घोषित किया। क्या थी इस समझौते की आत्मा? उसकी आत्मा में एनआरसी था। इसमें कहा गया था कि अवैध घुसपैठियों को पहचान कर उन्हें अलगकर एक नेशनल सिटीजन रजिस्टर बनाया जाएगा। यह आपके ही (कांग्रेस) प्रधानमंत्री की देन है।’’

    विपक्ष के चार सुझाव :

    राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘‘हमारे कुछ सुझाव हैं। पहला- एनआरसी की लिस्ट में जिन व्यक्तियों के नाम नहीं हैं, सिर्फ उन्हें ही अपनी नागरिकता को साबित नहीं करना चाहिए, बल्कि सरकार को भी यह बताना चाहिए कि वे कैसे भारतीय नागरिक नहीं हैं? दूसरा- इस ड्राफ्ट से बाहर हुए हर व्यक्ति को सरकार कानूनी मदद दे। तीसरा- इस दौरान किसी को भी परेशान और प्रताड़ित नहीं किया जाए। चौथा- नागरिकता साबित करने के लिए एनआरसी ने 16 बिंदु तय किए हैं। अगर कोई एक भी बिंदु को पूरा करता है, तो उसे लिस्ट में शामिल करना चाहिए।’’

    लोकसभा में रोहिंग्या मुद्दे पर हंगामा:

    मंगलवार को लोकसभा में तृणमूल सांसद सौगत बोस ने कहा कि विदेश मंत्रालय बांग्लादेश में रोहिंग्या के लिए ‘ऑपरेशन इंसानियत’ चला रहा है। भारत में 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थी हैं। क्या हम सिर्फ बांग्लादेश में रहने वाले रोहिंग्या के लिए ही इंसानियत दिखाएंगे? इस पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि दुनिया में भारत ही एकमात्र देश है, जो शरणार्थियों के लिए इतनी नरमी दिखाता है। वहीं, गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ”बीएसएफ और असम राइफल्स रोहिंग्या की घुसपैठ पर लगाम लगाए हुए हैं। राज्य सरकारों को रोहिंग्या की गिनती करने को कहा गया है। उनका बॉयोमैट्रिक डेटा जुटाया जा रहा है।”

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