-उत्तराखंड में 86 पुल नहीं है सुरक्षित, सबसे अधिक पौड़ी में
देहरादून। प्रदेश में लगातार हो रही बरसात से ऋषिकेश-गंगोत्री और ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग सहित प्रदेश में करीब 200 सड़कें बद है, जिन्हें खोलने का कार्य जारी है। मौसम विभाग की ओर से आगामी 31 जुलाई तक के लिए प्रदेश भर में गरज-चमक के साथ भारी वर्षा को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। शासन-प्रशासन आपदा विभाग चेतावनी को लेकर अलर्ट मोड पर है।
मौसम विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश भर में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने और वर्षा के तीव्र से तीव्र दौर को लेकर 31 जुलाई के लिए येलो अलर्ट की चेतावनी जारी की गई है। आज सुबह से देर शाम तक आसमान में पूरी तरह से बादल छाये रहे। सूर्यदेव बादलों की ओट में दिन भर लुकाछिपी करते रहे। देहरादून सहित आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम दौर का वर्षा देर शाम तक जारी रहा।
उत्तरकाशी जिले में ऋषिकेष-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग 108 बारसू के पास मलबा आने के चलते बाधित है। चमोली जिले में ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग 58 कमेड़ा के पास 100 मीटर रोड वॉशआउट होने से यातायात बाधित है। बीआरओ टीम की ओर से मार्ग खोलने के लिए कार्यवाही की जा रही है।
राज्य आपदा परिचालन के सायं 06 बजे जारी बुलेटिन के मुताबिक राज्य में दो राष्ट्रीय राजमार्ग और पिथौरागढ़ में दो बार्डर राजमार्ग सहित प्रदेश भर में अन्य 200 सड़कें बंद हैं। इन सड़कों में 07 राज्य मार्ग भी बंद है, जिन्हें खोलने का कार्य जारी है। लोक निर्माण विभाग की ओर से कुल 227 जेसीबी मशीनें बंद मार्ग को खालने के लिए लगाई गई है।
2250 पुलों की सेफ्टी ऑडिट शुरुआती दौर में:
सचिव लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज पांडेय ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों पर लोक निर्माण विभाग ने पुलों की जांच शुरू कर दी है। उत्तराखंड में कुल 3262 पुल हैं। इनमें से लगभग 2250 पुलों की सेफ्टी ऑडिट शुरुआती दौर में की गई है। इनमें से 86 पुल खतरनाक स्थिति में पाए गए हैं। सबसे अधिक पौड़ी जिले में 18, देहरादून 14 और चमोली में 13 पाये गये हैं, जबकि 1012 पुलों का अभी निरीक्षण करना है। ऐसे पुलों की रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है, जो मामूली मरम्मत से ठीक हो सकते हैं या पूरी तरह उन्हें नए रूप से तैयार करना होगा। इसके लिए बजट का प्रावधान भी कराया जा रहा है।
आपसी समन्वय के साथ बाढ़ प्रबंधन योजना पर कार्य करें: आपदा सचिव
सचिवालय में सचिव आपदा प्रबंधन सचिव डॉ रंजीत कुमार सिन्हा ने विभिन्न क्षेत्रों विशेष रूप से राज्य के मैदानी क्षेत्रों के लिए बाढ़ प्रबंधन योजना बनाने के संबंध में सिंचाई विभाग उत्तराखंड,सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश, केंद्रीय जल आयोग, आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ बाढ़ प्रबंधन योजना पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जल आयोग वेबसाइट में समस्त बड़ी नदियों के जलस्तर की रिपोर्ट प्रत्येक घंटे में अपडेट करने को कहा।
राज्य के पहाड़ी एवं मैदानी क्षेत्रों की नदियों के जल संग्रहण क्षेत्र में होने वाली वर्षा के साथ ही ऊपरी क्षेत्र में नदियों के जल स्तर व जल प्रवाह की जानकारी के आधार पर चेतावनी की व्यवस्था मजबूत कर आम जनों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
सचिव आपदा प्रबंधन ने केन्द्रीय जल आयोग के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कुमाऊं मण्डल की प्रमुख नदियों में भी बाढ़ पूर्वानुमान सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही केन्द्रीय जल आयोग के कुमाऊं डिविजन, आपदा प्रबंधन कार्यालय देहरादून में भी सूचनाओं के आदान-प्रदान करने और भारतीय सर्वेक्षण विभाग से पूरे राज्य के डिजिटल टोपेग्राफिक मानचित्र प्राप्त कर मानचित्र पर आंकड़ों को रेखांकित करने को कहा है।
सचिव आपदा प्रबंधन द्वारा वांछित बाढ़ पूर्वानुमान और जल भराव के दृष्टिगत सिंचाई विभाग देहरादून को एक कन्सेप्ट नोट तैयार करने को कहा ताकि केन्द्रीय जल आयोग से कार्यवाही के लिए अनुरोध किया जा सके।