रांची। स्वच्छ भारत मिशन में कॉन्ट्रैक्ट पर वर्षों से काम करने वाले ब्लॉक कोआर्डिनेटर और सोशल मोबलाइजरों की सेवा 31 मार्च 2024 से समाप्त की जा चुकी है। राज्य राज्य भर में इनकी संख्या 500 से भी अधिक है। सोमवार को इन कर्मियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रांची में श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता से उनके आवास पर भेंट की। एसबीएम अनुबंध कर्मचारी महासंघ के महासचिव कौशर आजाद ने उन्हें बताया कि वर्षों से काम करने और अहम उपलब्धियों के बावजूद उन सबों को पिछले साल से लेकर इस साल मार्च माह की अवधि में सेवा से बाहर कर दिया गया है। एसबीएम फेज-2 और जल जीवन मिशन में जारी नयी नियुक्तियों में भी उनकी अनदेखी हो रही। ऐसी शर्तें रख दी गयी हैं कि 2006-07 से एसबीएम प्रोग्राम में काम कर चुके अनुभवी कर्मियों को भी मौका नहीं बन सका है। इस पर श्रम मंत्री ने आश्वस्त करते कहा कि जिन लोगों ने सेवाएं पूर्व में दी हैं, उन्हें सेवा से बाहर ना किया जाये, इसका वे प्रयास करेंगे।
सभी का हो समायोजन: मंत्री
मंत्री ने एसबीएम प्रोग्राम से हटाये गये कर्मियों की समस्याओं को सुनने के बाद विभागीय सचिव (पेयजल एवं स्वच्छता) से फोन पर बात की। कहा कि वर्तमान सरकार योग्य लोगों, युवाओं को नियुक्ति पत्र बांट रही और आप सब अपने विभाग से हटा रहे। यह आदर्श स्थिति नहीं है। चाहे जैसे हो, सभी कर्मियों का समायोजन हर हाल में किया जाना चाहिए। इस पर सचिव ने वाजिब पहल करने की बात कही।
फंड की उपलब्धता पर भी उदासीनता: महासंघ
एसबीएम अनुबंध कर्मचारी महासंघ के मुताबिक, पूर्व में भी सभी ने अपने हक, अधिकार के लिए विभागीय मंत्री, सचिव और अन्य के पास फरियाद लगायी पर सुनवाई नहीं हुई। फंड की कमी, कर्मियों की संख्या सीमित किये जाने की बात कही गयी। जबकि सच यह है कि ना तो केंद्र से फंड की कमी है, ना मैनपावर बढ़ाये जाने से रोका गया है। पहले राज्य भर के हर प्रखंड (264) में कॉन्ट्रैक्ट पर ब्लॉक कोआर्डिनेटर हुआ करते थे। इससे 500 से अधिक लोग सेवा दे रहे थे। अब इसे प्रमंडल स्तरीय किये जाने (32 प्रमंडल) से यह संख्या महज 64 तक हो गयी है। इससे भारी संख्या में अनुभवी कर्मियों को नयी नियुक्तियों में मौका नहीं मिल पा रहा। ऐसे में महासंघ अब विभागीय मंत्री, सचिव से उम्मीद नहीं मिलता देख अब श्रम मंत्री से आस लगा रहा है।