-लोकसभा चुनाव में मुंह की खाने के बाद भाजपा में बेचैनी और बौखलाहट है
रांची। झामुमो ने भाजपा के विधानसभा चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान और सह प्रभारी हिमंत विस्व सरमा को आड़े हाथ लिया। मंगलवार को झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने पार्टी कार्यालय में कहा कि हिमंत जी आज फिर आये हैं। वे यहां पर रिचार्ज होने आये हैं। लोकसभा चुनाव में ये लोग डिस्चार्ज हो गये। फिर उपचुनाव में डिस्चार्ज हुए, इसलिए ये लोग यहां पर रिचार्ज होने आ रहे हैं। समाज और जाति को बांटने आ रहे हैं। अगले चुनाव में झारखंड की जनता इन्हें पूरी तरह से डिस्चार्ज करके ही दम लेगी। वैसे भी हिमंत का काम ही है समाज में जहर घोलना। सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि लोकसभा चुनाव में मुंह की खाने के बाद भाजपा में बेचैनी और बौखलाहट है। 20 जुलाई को प्रभात तारा मैदान में केंद्रीय गृह मंत्री समेत अन्य केंद्रीय भाजपा नेताओं का आगमन होने जा रहा है। महाराष्ट्र, हरियाणा और जम्मू कश्मीर का स्पष्ट संदेश इन्हें मिल चुका है। झारखंड में इन लोगों को फीडबैक मिलना शुरू हो गया है। इसलिए इनमें बेचैनी है। लेकिन यहां कुछ भी कर लें, झारखंड से इनका विधानसभा चुनाव में सफाया तय है। झारखंड की जनता अब नफरत को सहन नहीं करेगी। चाहे जिसे जितना जहर घोलना है, घोल ले।

सीएए और एनआरसी पर कुछ नहीं बोलते
उन्होंने कहा कि हिमंत को असम में बाढ़ की स्थिति नहीं दिख रही है, जहां पर 180 से अधिक लोग मारे गये। कई हजार लोग बेघर हो गये। यहां पर सदियों से लोग बसे हैं। आपसी सौहार्द्र कायम है। भातृत्व कायम है। इनके खिलाफ इन्हें बोलने के लिए लाया गया है। मगर यह झारखंड है। यह असम नहीं है। उनसे पूछना चाहिए कि असम में एनआरसी कहां गया। एनआरसी में वहां की बड़ी संख्या में जो हिंदू संप्रदाय के लोग हैं, उनका नाम रजिस्टर में नहीं चढ़ा। वे सीएए और एनआरसी पर कुछ नहीं बोलते हैं, कहां गये ये दोनों मुद्दे, क्या हुआ इन मुद्दों का। इस पर वे क्यों नहीं कुछ बोलते हैं। जिस बंगाल की सीट से जीत कर एक सांसद केंद्रीय मंत्री बने हैं, वहां जाकर जरा कुछ क्यों नहीं बोलते हैं। सुप्रियो ने कहा कि यहां उन्हें नफरत की राजनीति को बढ़ावा देने के लिए बुलाया गया है। हिमंत जी यहां नफरत का बीज न बोयें, जरा असम को जाकर देखें। सरकारी सुविधा का इस्तेमाल समाज को बांटने के लिए न हो। यहां पर एमएसपी (मतदाता समर्थन पत्र) खोजने के लिए आ रहे हैं। किसी के आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं है। वैसे भी ये लोग केंद्रीय मंत्री और किसी राज्य के सीएम हैं, इसलिए प्रोटोकॉल के तहत हमें उन्हें सरकारी सुरक्षा और सुविधा करानी ही है। लेकिन सरकारी सुविधा का उपयोग समाज को बांटने के लिए न किया जाये।

बाबूलाल को फील्ड में जाने की हिम्मत नहीं, हर दिन चार से पांच ट्वीट कर रहे
सुप्रियो ने कहा कि बाबूलाल आजकल हर दिन चार से पांच ट्वीट कर रहे हैं। दरअसल इनके पास अब फील्ड में जाने की हिम्मत नहीं रही। इसलिए बंद कमरे से नया काम शुरू कर दिये हैं।

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