भोपाल/पन्ना: मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार और पुनर्वास के मुद्दों को लेकर चल रहा ‘चिता आंदोलन’ उग्र मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलन के 17वें दिन, रविवार तड़के सुबह करीब 5 बजे भारी पुलिस बल ने प्रदर्शन स्थल को चारों तरफ से घेर लिया। पुलिस ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर सहित लगभग 300 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है।
यह पूरी कार्रवाई पन्ना और छतरपुर जिले की सीमा पर स्थित कुपी गांव के पास, बनाला नदी पर निर्माणाधीन पुल के निकट बने मंच पर की गई। आंदोलनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने सोते हुए प्रदर्शनकारियों को बर्बरतापूर्वक गाड़ियों में भर लिया। पिछले 14 दिनों से बिना अन्न-जल के आमरण अनशन पर बैठे अमित भटनागर की हालत बिगड़ने के कारण पुलिस उन्हें मेडिकल जांच के लिए साथ ले गई है, लेकिन उन्हें किस स्थान पर रखा गया है, इसकी जानकारी अभी गुप्त है।
भ्रष्टाचार के दस्तावेज उजागर होने के डर से कार्रवाई का आरोप
आंदोलन से जुड़ीं विजावर नगर परिषद की पार्षद दिव्या अहिरवार ने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अमित भटनागर रविवार दोपहर को सिंचाई परियोजनाओं में हुए बड़े भ्रष्टाचार से जुड़े अहम सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक करने वाले थे। इसी खुलासे से घबराकर प्रशासन ने तड़के यह दमनकारी कदम उठाया और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने का प्रयास किया।
भटनागर का आरोप है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांव डैम, रुंझ, नैगुवां और एनटीपीसी से जुड़ी परियोजनाओं में अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से 400 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है। आरोप है कि फर्जी ग्राम सभाएं कराकर अपात्रों को मुआवजा बांटा गया, जबकि 50 हजार से अधिक वास्तविक पात्र विस्थापित आज भी भटक रहे हैं।
प्रशासन ने बताया कानून-व्यवस्था के लिए जरूरी कदम
दूसरी ओर, छतरपुर और पन्ना जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया है। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन करने वालों में अधिकांश लोग पन्ना जिले के रुंझ और मझगांव प्रोजेक्ट से प्रभावित हैं, जिनका छतरपुर जिले में मुआवजे की प्रक्रिया से कोई सीधा संबंध नहीं है।
बिजावर के एसडीएम विजय द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट बुंदेलखंड के विकास के लिए एक राष्ट्रीय महत्व की योजना है। पन्ना जिले के विस्थापितों की शिकायतों का निवारण वहीं का स्थानीय प्रशासन करेगा। प्रशासन ने आंदोलनकारियों से अपने गृह जिले लौटकर अधिकारियों से संवाद करने और शांति बनाए रखने की अपील की है।



