-वाहन व्यवस्था से नाराज़गी के बाद लिया फैसला, डीजीपी को लिखा पत्र, उठे सवाल
रांची। झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर इन दिनों सियासी गलियारों और सोशल मीडिया पर अपने एक अनोखे फैसले को लेकर जबरदस्त चर्चा में हैं। मंत्री ने अपनी सुरक्षा में तैनात सभी 16 पुलिस जवानों और उनके लिए आवंटित तीन सुरक्षा वाहनों को राज्य सरकार को वापस सौंप दिया है। इस बड़े फैसले के बाद वे बिना किसी तामझाम और भारी-भरकम सुरक्षा काफिले के ही सीधे आम जनता के बीच और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। शुरुआत में इस कदम को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन अब डीजीपी को लिखे उनके पत्र से असली वजह सामने आ गई है।

सुरक्षा का नहीं, व्यवस्था का है मामला: मंत्री
पुलिस महानिदेशक (DGP) को लिखे पत्र में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया कि उनका यह फैसला किसी नाराजगी से ज्यादा व्यवस्था की कमी से जुड़ा है। मंत्री के अनुसार, उनकी सुरक्षा में 16 जवान तैनात थे, लेकिन उन्हें लाने-ले जाने के लिए सिर्फ तीन गाड़ियां दी गई थीं। ऐसे में सुरक्षाकर्मियों को एक ही गाड़ी में क्षमता से अधिक संख्या में बेहद असुरक्षित तरीके से बैठना पड़ता था। सफर के दौरान जवानों को होने वाली इस परेशानी को देखते हुए मंत्री ने 21 अप्रैल 2026 को पुलिस मुख्यालय से एक अतिरिक्त वाहन की मांग की थी, ताकि जवान सुरक्षित सफर कर सकें, मगर इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

खुद के ही विभाग से मिले नोटिस पर हुए शर्मिंदा
मामले में नया मोड़ तब आया जब अतिरिक्त गाड़ी मिलने के बजाय वित्त विभाग के संयुक्त सचिव पंकज कुमार सिंह ने मंत्री के आप्त सचिव (Personal Secretary) को एक नोटिस थमा दिया। इस नोटिस में वर्ष 2022 के एक पुराने आईजी प्रोविजन आदेश का हवाला देते हुए, वर्तमान में मौजूद तीन गाड़ियों में से भी एक गाड़ी तुरंत पुलिस मुख्यालय को वापस करने का अनुरोध किया गया था।

दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह है कि जिस वित्त विभाग के संयुक्त सचिव ने यह नोटिस जारी किया, उसके कैबिनेट मंत्री खुद राधाकृष्ण किशोर ही हैं। मंत्री ने पत्र में लिखा कि अपने ही विभाग से इस तरह का नोटिस मिलना उनके लिए बेहद असहज और शर्मिंदगी की स्थिति पैदा करने वाला था। इसी आत्मसम्मान और जवानों की असुविधा के कारण उन्होंने वाहन सहित पूरे पुलिस बल को वापस करने का कड़ा फैसला लिया।

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