गुमला: एक ओर शुक्रवार को गुमला में स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी नियुक्ति पत्र बांटते हुए स्वास्थ्य विभाग की उपलब्घियां गिना रहे थे, वहीं गुमला में ही एक आठ वर्ष के बच्चे की मौत स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रही थी। सदर अस्पताल गुमला में एक भी दवा नहीं मिलने के कारण उस तड़पते बच्चे की जान चली गयी। इतना ही नहीं, बच्चे की मौत के बाद उसके शव को ले जाने के लिए पिता की पीठ का ही सहारा मिला, क्योंकि वहां दूसरी कोई व्यवस्था गरीब को मुहैया नहीं करायी गयी। दुखी पिता को अपने छोटे बच्चे के शव को पीठ पर बांध कर ले जाते देख वहां मौजूद हर एक व्यक्ति द्रवित हो गया।
एक रुपये तक की दवा नहीं मिली गुमला के सदर अस्पताल में
ममरला स्कूल बसिया की पहली कक्षा में अध्ययनरत आठ वर्षीय सुमन सिंह नामक बच्चे की मौत शनिवार को सदर अस्पताल गुमला में इलाज के क्रम में हो गयी। पैसे के अभाव में मृतक छात्र के पिता करण सिंह ने अपनी पीठ पर बांध कर शव को श्मशान घाट पहुंचाया। जानकारी के अनुसार छात्र सुमन सिंह गुरुवार संध्या से तेज ज्वर में तप रहा था। परिजनों ने उसे इलाज के लिए रेफरल अस्पताल सिसई में भर्ती कराया, जहां से चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उसे सदर अस्पताल गुमला रेफर कर दिया। वहां इलाज के क्रम में शनिवार को उसकी मौत हो गयी। मृतक की मां देवकी देवी ने बताया कि गरीबी के कारण वे अपने बच्चे का सही से इलाज नहीं करवा पायीं। गुमला में चिकित्सकों ने बच्चे का सही से इलाज नहीं किया। अस्पताल प्रबंधन द्वारा एक रुपये की दवा भी नहीं उपलब्ध करायी गयी, जिस कारण मेरे बच्चे की मौत हो गयी।
दवा के बगैर इलाज नहीं करा पा रहे हैं मरीज
गुमला। अच्छी व्यवस्था को लेकर इसी सदर अस्पताल को पिछले दिनों राज्य सरकार की ओर से पुरस्कृत भी किया गया था, पर इसका हाल यह है कि न तो यहां दवा मिलती है और न समय पर चिकित्सक। सैकड़ों ऐसे मरीज हैं, जो अस्पताल में दवा नहीं मिलने के कारण यहां इलाज कराना नहीं चाहते। जब पत्रकारों ने मरीजों से बात की, तो सारे मरीजों ने कहा कि यहां कोई दवा नहीं मिलती, जिससे इलाज कराना मुश्किल हो रहा है। एंटी रेबीज की दवा लेने आये आंजन निवासी अनिल महली, अन्य बीमारी से परेशान कोलेबिरा निवासी करमदयाल साहू, टोटो निवासी मुनीजा बीबी आदि ने कहा कि उन्हें यहां कभी दवा नहीं मिली, सिर्फ परची थमा दी जाती है। सिविल सर्जन जेपी सांगा ने बताया कि जो दवाएं स्टाक में हैं, वो मरीजों को दी जा रही हैं।