रांची। हर दिल में बसनेवाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी देश के लिए सबको जोड़कर चलना चाहते थे। वह जाति, धर्म और दलों से ऊपर उठकर देश को लेकर चलने की बात करते थे। उनकी यही सोच रांची में शुक्रवार को सार्थक होती दिखी, जब उनके सम्मान में आयोजित सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा में हर दल, हर वर्ग और हर मजहब के लोग जुटे और उन्हें नमन किया। अटल जी का व्यक्तित्व ही कुछ ऐसा था कि झारखंड में एक-दूसरे के घोर विरोधी दल और नेता, जो सदन में भी आमने-सामने बैठ नहीं पाते, आज अपने पूर्व प्रधानमंत्री और प्रिय नेता को एक साथ, एक मंच पर श्रद्धांजलि देते नजर आये। अटल जी ने जो अटल भारत का सपना देखा था, वह साकार होता नजर आया। यहां हर कोई दल और वर्ग से ऊपर उठकर आया था, जैसा कि अटल जी चाहते थे। राजनीतिक परिदृश्य में ऐसे अवसर कम ही देखने को मिलते हैं। इससे पहले अटलजी की अस्थियां रांची पहुंचीं। उनके नमन करने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक लोगों का रेला लगा रहा। भीड़ ऐसी थी कि कार्निवल हॉल छोटा पड़ गया। यह बताता है कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी लोगों के बीच कितने लोकप्रिय थे। वह हर दिल में बसते थे।
अटल जी को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अटल जी के सपनों को साकार करने का संकल्प लिया। कहा कि हम आज उनके प्रति अपनी सच्ची श्रद्धांजलि समर्पित करते हैं। उनके सपनों का झारखंड हम बनायेंगे। यह हमारा कर्तव्य है। उनके सपनों को साकार करें, यह हमारे लिए एक अवसर है। हम इस कार्य में सफल होंगे। राज्य की सवा तीन करोड़ जनता की ओर से राज्य के जनक श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

जो कहा, सो किया :रघुवर दास ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं था। उन्होंने कहा था कि अलग झारखंड राज्य बनायेंगे और बनाकर दिया। सिर्फ झारखंड ही नहीं, उन्होंने उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ राज्य बनाने का वादा किया था, उसे भी पूरा किया। वह लोगों के दिलों में बसते थे। देश के महान सपूत अटल जी के आदर्श और जीवन के प्रति जो उनका रुख था, वह आज भी प्रेरणा प्रदान करता है।

सदियों में कभी-कभी ही जन्म लेती है ऐसी विभूति : मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी जैसी विभूतियां पृथ्वी पर सदियों में कभी-कभी ही जन्म लेती हैं। अटल जी हिंदुस्तान के एक मात्र ऐसे वक्ता थे, जो सड़क से लेकर संसद तक के श्रोताओं को समान रूप से प्रभावित करते थे। अटल जी का भाषण केवल सुना नहीं जाता, देखा जाता था। वे कभी अपनी आंखें बंद कर लेते थे और देश के श्रोताओं की आंखें खोल देते थे। आवाज में उतार-चढ़ाव करना कोई उनसे सीखे।

श्रद्धांजलि सभा में ये रहे मौजूद : सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा में हर दल, हर वर्ग और हर धर्म के लोग मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से मुख्यमंत्री रघुवर दास, राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, डॉ दिनेश उरांव, नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ, जयंत सिन्हा, सुदर्शन भगत, रवींद्र राय, रामटहल चौधरी, पीएन सिंह, कड़िया मुंडा, सुनील सिंह, नीलकंठ सिंह मुंडा, लुइस मरांडी, नीरा यादव समेत कई सांसद, मंत्री और विधायक, मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी, कांग्रेस से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, राजेश ठाकुर, राजीव रंजन, झामुमो से सुप्रियो भट्टाचार्य, अभिषेक पिंटू, झाविमो से योगेंद्र प्रताप सिंह, शोभा यादव, संतोष सिंह, राजद से गौतम सागर राणा, राजेश यादव, डॉ मनोज के अलावा पद्मश्री अशोक भगत, पद्मश्री मुकुंद नायक, पद्मश्री सिमोन उरांव, पद्मश्री बलबीर दत्त, सुनील बर्म्मन समेत अन्य शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश ने किया।

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