Close Menu
Azad SipahiAzad Sipahi
    Facebook X (Twitter) YouTube WhatsApp
    Friday, June 12
    • Jharkhand Top News
    • Azad Sipahi Digital
    • रांची
    • हाई-टेक्नो
      • विज्ञान
      • गैजेट्स
      • मोबाइल
      • ऑटोमुविट
    • राज्य
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
    • रोचक पोस्ट
    • स्पेशल रिपोर्ट
    • e-Paper
    • Top Story
    • DMCA
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Azad SipahiAzad Sipahi
    • होम
    • झारखंड
      • कोडरमा
      • खलारी
      • खूंटी
      • गढ़वा
      • गिरिडीह
      • गुमला
      • गोड्डा
      • चतरा
      • चाईबासा
      • जमशेदपुर
      • जामताड़ा
      • दुमका
      • देवघर
      • धनबाद
      • पलामू
      • पाकुर
      • बोकारो
      • रांची
      • रामगढ़
      • लातेहार
      • लोहरदगा
      • सरायकेला-खरसावाँ
      • साहिबगंज
      • सिमडेगा
      • हजारीबाग
    • विशेष
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • देश
    • दुनिया
    • राजनीति
    • राज्य
      • मध्य प्रदेश
    • स्पोर्ट्स
      • हॉकी
      • क्रिकेट
      • टेनिस
      • फुटबॉल
      • अन्य खेल
    • YouTube
    • ई-पेपर
    Azad SipahiAzad Sipahi
    Home»राजनीति»झारखंड में आदिवासी हित और धर्म के नाम पर विरोध की गंदी राजनीति
    राजनीति

    झारखंड में आदिवासी हित और धर्म के नाम पर विरोध की गंदी राजनीति

    azad sipahiBy azad sipahiAugust 3, 2018Updated:August 3, 2018No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter WhatsApp Telegram Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter WhatsApp Telegram LinkedIn Pinterest Email

    रांची। लोकतांत्रिक प्रणाली और राजनीति में विरोध एक सतत प्रक्रिया है लेकिन झारखंड में यह विरोध असामाजिक गतिविधियों, कुछ मामले में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों तक का रूप लेने लगा है। विरोध के नाम पर कुछ कथित बुद्धिजीवियों और धर्म विशेष के ठेकेदार होने का दावा करने वालों ने समाज के एक वर्ग को भटकाने की साजिश की है। पहले पत्थलगड़ी के नाम पर सरकार व विकास कार्यों का विरोध और फिर बच्चों को बेचने के मामले में धर्म विशेष के कुछ लोगों के घेरे में आने के बाद उसके प्रतिनिधि समेत कुछ राजनेता भी न सिर्फ खुलकर उनके समर्थन में आए बल्कि पुलिस कार्रवाई का भी आदिवासी हित के नाम पर विरोध किया। हैरत की बात है कि स्कूल के फादर और उनके सहयोगियों के इशारे पर पांच आदिवासी युवतियों से सामूहिक दुष्कर्म की घटना और उसके आरोपित पत्थलगड़ी समर्थकों व नक्सलियों के खिलाफ इनमें से किसी ने एक शब्द तक नहीं कहा।
    यहां तक कि बच्चे बेचे जाने की घटनाओं पर भी उनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। सच तो यह है कि झारखंड को सबसे ज्यादा नुकसान आदिवासी हित के नाम पर राजनीति करने वाले कुछ तथाकथित नेताओं और धर्म विशेष के नाम पर सेवा की आड़ में सिर्फ सरकारी और गैरसरकारी संगठनों से मोटी रकम वसूलने वालों ने सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि आदिवासी हित के नाम पर सकारात्मक और सही सोच के साथ राजनीति करने वाले नेताओं की कभी कमी नहीं रही है। इसी तरह धर्म के साथ सेवा करने वालों ने भी झारखंड को बिना किसी स्वार्थ के भरपूर दिया है। धर्म विशेष के नाम पर चल रहे शिक्षण संस्थान और अस्पतालों का गौरवमयी इतिहास इसके प्रमाण हैं। लेकिन इसमें भी दो राय नहीं कि दोनों की ही आड़ में अपने स्वार्थ की रोटी सेंकने वालों की भी कमी नहीं है। ऐसे लोगों को ही अपराधियों के खिलाफ पुलिस और सरकार की कार्रवाई धर्म और आदिवासी समाज पर हमला नजर आने लगा है।
    पत्थलगड़ी के नाम पर सरकार और विकास कार्यों का विरोध, नक्सली गतिविधियां और अब धर्म और सेवा के नाम पर बच्चे बेचने की घटना पर कार्रवाई के विरोध में आक्रामक एकजुटता में कहीं न कहीं सरकार को अस्थिर करने का प्रयास दिख रहा है। यह प्रयास अभी तक अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा था लेकिन अब इन मामलों को समेकित दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। शुरुआत पत्थलगड़ी से करें संविधान की पांचवीं अनुसूची का सहारा लेकर कुछ असामाजिक व देशद्रोही ताकतों ने केंद्र और राज्य सरकार के अधिकार व अस्तित्व को चुनौती देकर पत्थलगड़ी की आड़ में इलाके में चल रही सारी सरकारी एवं विकास कार्यों की गतिविधियों को ठप करा दिया। यहां तक कि अधिकारियों व कर्मचारियों के इलाके में प्रवेश पर रोक लगा दी। पुलिस ने हस्तक्षेप की कोशिश की तो उसके अधिकारियों व कर्मचारियों को बंधक बनाकर पीटा गया। हद तो तब हो गई जब सरकारी तंत्र के प्रवेश को बंद करने के बाद पत्थलगड़ी की आड़ में स्कूलों को बंद करने, अफीम की खेती को बड़े पैमाने पर करने तथा देह व्यापार के लिए नाबालिग लड़कियों को दूसरे राज्यों में भेजने की घटनाएं जबर्दस्त तरीके से बढ़ गईं।
    इन सब बातों को आदिवासी हित के नाम पर जोड़कर सरकार पर चुप रहने का दबाव बनाया गया। सरकार चुप बैठी भी रही। संयोग से उसी दौरान इलाके के ही कुछ कुछ पढ़े-लिखे आदिवासी युवाओं ने इसके विरोध में नुक्कड़ नाटक के जरिये जब लोगों को जागरूक करना शुरू किया तो उन्हें सबक सिखाने के लिए नाटक के बहाने सुदूर गांव में बुलाकर स्कूल के पादरी के इशारे पर पत्थलगड़ी समर्थकों और नक्सलियों ने सामूहिक दुष्कर्म कर साफ कर दिया कि उनके लिए स्थानीय हित से ज्यादा निजी हित हैं। इसके बाद सरकार की आंखें खुलीं और उसने आक्रामक तरीके से इलाके में प्रवेश कर कार्रवाई की। हालांकि पुलिस की कार्रवाई में अब फिर थोड़ी सुस्ती नजर आने लगी है। परिणामस्वरूप पत्थलगड़ी समर्थक पुन: सक्रिय होते नजर आ रहे हैं। बच्चों को बेचने का मसला अहम दूसरा अहम मसला मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज आफ चैरेटी के तहत चल रहे निर्मल हृदय संस्था में नवजात बच्चों को बेचने तथा उन्हें धर्म प्रचार में लगाने का है।
    इस प्रकरण के खुलासे के बाद सरकार ने सख्त कार्रवाई शुरू की। दिलचस्प पहलू यह है कि यह मामला पहले ही प्रकाश में आ गया था लेकिन तब मामले का खुलासा करने वाले बाल संरक्षण आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह को मिशनरीज आफ चैरिटी संस्था की एक कर्मचारी द्वारा छेड़छाड़ की शिकायत पर पद से हटा दिया गया था। राहत की बात है कि सरकार की ओर से उचित जांच और कार्रवाई शुरू हो चुकी है लेकिन यह सतत और ईमानदारी से हो तभी इस बड़े और गंदे नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा। यह चुनौती सरकार के लिए भी है।

    Share. Facebook Twitter WhatsApp Telegram Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Previous Articleपूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती को इलाज के लिए मिली औपबंधिक जमानत
    Next Article रेलवे को टिकट कैंसिल कराने से हुआ 13.94 अरब रुपये का मुनाफा
    azad sipahi

      Related Posts

      झारखंड राज्यसभा चुनाव: नामांकन पर हाई-वोल्टेज ड्रामा, गेट पर रोके गए दिग्गज कांग्रेसी नेता सलमान खुर्शीद

      June 10, 2026

      भगवान बिरसा मुंडा का धर्म-परिवर्तन के खिलाफ संघर्ष और आदिवासी गौरव के प्रति उनका समर्पण प्रेरणा का स्रोत : अमित शाह

      June 9, 2026

      राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस पर्यवेक्षक भूपेश बघेल ने कहा- शाम को गठबंधन की बैठक, रात्रि भोज में होगा फैसला

      June 7, 2026
      Add A Comment

      Comments are closed.

      Recent Posts
      • दिल्ली के पश्चिम विहार में चली ताबड़तोड़ गोलियां, बदमाशों ने गुरु रंधावा के जिम को बनाया निशाना, लॉरेंस गैंग ने ली जिम्मेदारी
      • तृणमूल कांग्रेस को एक और झटका, राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने दिया इस्तीफा
      • मणिपुर में छह नागा नागरिकों की हत्या मामले की जांच एनआईए ने संभाली, फोरेंसिक जांच शुरू
      • कल्याण बनर्जी ने अभिषेक के खिलाफ खोला मोर्चा, कानूनी पैरवी से किया किनारा
      • प्रधानमंत्री मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ने तमिल अभिनेता भारतीराजा के निधन पर जताया शोक
      Read ePaper

      City Edition

      Follow up on twitter
      Tweets by azad_sipahi
      Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

      Palamu Division

      • Garhwa
      • Palamu
      • Latehar

      Kolhan Division

      • West Singhbhum
      • East Singhbhum
      • Seraikela Kharsawan

      North Chotanagpur Division

      • Chatra
      • Hazaribag
      • Giridih
      • Koderma
      • Dhanbad
      • Bokaro
      • Ramgarh

      South Chotanagpur Division

      • Ranchi
      • Lohardaga
      • Gumla
      • Simdega
      • Khunti

      Santhal Pargana Division

      • Deoghar
      • Jamtara
      • Dumka
      • Godda
      • Pakur
      • Sahebganj

      Subscribe to Updates

      Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

      © 2026 AzadSipahi. Designed by Launching Press.
      • Privacy Policy
      • Terms
      • Accessibility

      Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

      Go to mobile version