रांची : प्रतिबंधित भाकपा माओवादी व पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआइ) समान विचारधारावाले संगठनों के साथ मिलकर संयुक्त फ्रंट बनाना चाह रहे हैं. इसका उद्देश्य सरकार के खिलाफ प्रचार करना है, जैसा कि इन दोनों संगठन के लोगों ने केरल में दो माओवादी नेताओं के मारे जाने के बाद किया था. केंद्र ने राज्य सरकार को इससे संबंधित सूचना भेजी है. साथ ही इन संगठनों पर नजर रखने का निर्देश दिया है. केंद्रीय गृह विभाग के उपसचिव हेमलता ने राज्य के गृहसचिव को इस संबंध में पत्र भेजा है.
इसमें कहा गया है कि झारखंड सरकार ने माओवादी संगठन, पीएफआइ और मजदूर संगठन समिति को प्रतिबंधित कर दिया है. अब समान विचारधारावाले ये संगठन अपने समान उद्देश्यों के लिए संयुक्त फ्रंट बनानेे की कोशिश कर रहे हैं. इनमें से कुछ संगठनों ने झारखंड सरकार द्वारा लगायी गयी पाबंदी की आलोचना की है.
कहा जा रहा है कि सरकार इन संगठनों पर पाबंदी लगा कर आदिवासियों को अपना निशाना बना रही है और विस्थापन सहित अन्य मुद्दों पर जारी आंदोलन को दबाना चाह रही है. सरकार सुनियोजित योजना के तहत इन संगठनों पर पाबंदी लगा कर अल्पसंख्यकों के अधिकार के लिए चल रहे संगठन के काम को भी प्रभावित कर रही है. रिपोर्ट में विस्थापन विरोधी आंदाेलन के नेताआें और रिवोल्यूशनरी डेमोक्रेटिक फ्रंट के लाेगाें का भी नाम है. पत्र के मुताबिक इन संगठनों का संबंध माओवादियों से है. गृह विभाग को इस बात की सूचना है कि इन संगठनाें में से एक ने झारखंड हाइकोर्ट में माओवादी संगठनों को कानूनी सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. माओवादियों से करीबी संबंध रखनेवालाें ने झारखंड सरकार द्वारा माओवादी संगठनों और पीएफआइ पर लगायी गयी पाबंदी को वापस लेने की मांग की है. केंद्र ने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार इन संगठनों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे और रोकने के लिए जरूरी कदम उठाये.
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