रांची. संथाल परगना क्षेत्र से बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर करने के लिए झारखंड सरकार भी सक्रिय हो गई है। राज्य सरकार पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय से असम की तर्ज पर नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप तैयार करने का आग्रह कर चुकी है। गृह विभाग के प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे ने कहा कि महानिबंधक जनगणना को भी झारखंड में इसके लिए जनगणना कराने का आग्रह किया गया है। गृह मंत्रालय की स्वीकृति मिलते ही झारखंड में भी एनआरसी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। एनआरसी तैयार होने पर डेढ़ लाख से अधिक बांग्लादेशियों को झारखंड छोड़ना होगा। बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ आवाज उठाने वाले भाजपा विधायक अनंत कुमार ओझा ने कहा कि एक सप्ताह बाद वह इस मुद्दे पर फिर मुख्यमंत्री और गृह सचिव से मिलेंगे। एनआरसी की जानकारी हासिल करने स्पेशल ब्रांच के एसपी धनंजय सिंह को सरकार ने असम भेजा था। वहां से लौटकर उन्होंने स्पेशल ब्रांच के एडीजी को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट दे दी है।

साहेबगंज, पाकुड़, गोड्‌डा में सबसे अधिक बांग्लादेशी:

साहेबगंज, पाकुड़, गोड्डा और जामताड़ा इलाके में सबसे अधिक बांग्लादेशियों के घुसपैठ के प्रमाण मिल रहे हैं। साहेबगंज, राजमहल तथा बड़हरवा इलाके में इनकी संख्या सबसे अधिक है। ये लोग यहां जमीन भी खरीद रहे हैं।

1994 में चिह्नित किए गए थे 17,054 बांग्लादेशी:

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर 1994 में साहेबगंज के तत्कालीन डीसी सुभाष शर्मा ने मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराया था। उसमें 17,054 बांग्लादेशियों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। हालांकि सरकार की ठोस पहल नहीं होने की वजह से इन्हें वापस बांग्लादेश नहीं भेजा जा सका।

इसी महीने साहेबगंज से पकड़ा गया था बांग्लादेशी:

21 जुलाई को साहेबगंज के राधानगर थाना क्षेत्र में आतुर शेख उर्फ अताउर शेख को बांग्लादेशी होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आतुर शेख का का मतदाता सूची में जिस परिवार के साथ नाम शामिल किया गया है, उस परिवार का मुखिया माजेद शेख ने उससे संबंध होने से इंकार कर दिया।

क्या है एनआरसी?

किसी क्षेत्र विशेष के लोगों की भारतीय नागरिकता की पहचान उनकी वंशावली के आधार पर की जाती है। 1985 में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर असम में तैयार किए गए एनआरसी के लिए 1951 की जनगणना और 1952 की मतदाता सूची को आधार बनाया गया। इन दोनों सूचियों में वहां रह रहे लोगों के जिन पूर्वजों का नाम हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र एसडीओ द्वारा दिया गया।

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