रांची। रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड मामले की सुनवाई में अब तेजी आयेगी। अब 24 सितंबर से मामले में गवाही की प्रक्रिया शुरू होगी। एनआइओ को गवाह प्रस्तुत करने को कोर्ट ने कहा है। एनआइए की गवाही में दो सरकारी गवाह राममोहन सिंह मुंडा एवं टिपरू की गवाही राजा पीटर एवं कुंदन पाहन के गले की फांस बनेगी। कारण नक्सली राममोहन सिंह मुंडा कभी कुंदन पाहन के सहयोगी के रूप में रहा था। वहीं आरोप के अनुसार राजा पीटर को विधायक बनाने में राममोहन सिंह मुंडा का प्रत्यक्ष रूप से सहयोग रहा है। वैसे, मामले में पूर्व मंत्री गोपाल सिंह पातर उर्फ राजा पीटर, नक्सली कुंदन पाहन, बलराम साहू समेत 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप गठन हो चुका है। आरोप गठन के दौरान कोर्ट ने राजा पीटर को छोड़कर अन्य सभी आरोपियों के खिलाफ एक तरह केआरोप को पढ़कर सुनाया था। राजा पीटर पर आरोप सुनाते हुए कोर्ट ने उससे कहा था कि षडयंत्र के तहत उसने रमेश सिंह मुंडा की हत्या कराने के लिए नक्सली संगठन का सहयोग लिया था। साथ ही उन्हें इस काम के लिए रुपये और हथियार भी उपलब्ध कराये थे। हालांकि आरोप गठन के दौरान राजा पीटर ने अपने ऊपर लगाये गये आरोप को खारिज किया था और कहा था कि षडयंत्र के तहत उसे फंसाया गया है। यहां बता दें कि राजा पीटर ने 2005 में रमेश सिंह मुंडा के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गया था। रमेश सिंह मुंडा की मौत के बाद हुए 2008 के उपचुनाव में उसने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को हराकर सबको चौंका दिया था।
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