रांची. जिले में संचालित प्ले स्कूलों पर अब जिला प्रशासन फिर से शिकंजा कसने की तैयारी में जुट गया है। प्ले स्कूल संचालकों को जिला समाज कल्याण कार्यालय में रजिस्ट्रेशन कराने का निर्देश दिया गया था। जिसके बाद कुल 240 स्कूलों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन दिया है। वहीं, इनमें से 38 स्कूलों का वेरिफिकेशन भी कर लिया गया है। बाकी स्कूलों का वेरिफिकेशन भी जल्द होगा। लेकिन जिला प्रशासन के निर्देश के बावजूद जिन स्कूलों ने आवेदन देने में रुचि नहीं दिखाई है, उनके खिलाफ अब अभियान तेज किया जाएगा। जिला समाज कल्याण शाखा ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।
रांची जिले में चलने वाले प्ले स्कूलों की जांच की जिम्मेदारी सीडीपीओ- सुपरवाइजर की टीम को दी गई है। जिले में 16 सीडीपीओ हैं। प्रत्येक सीडीपीओ के साथ दो सुपरवाइजर की टीम स्कूलों पर नजर रखेगी। बिना रजिस्ट्रेशन के स्कूल चलाने वालों की सूची तैयार होगी। इसके आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जिन स्कूलों ने आवेदन दिया है, उनके पास रजिस्ट्रेशन के लायक सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं, इसका भी वेरिफिकेशन होगा। इसके बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
शहर में हैं सबसे ज्यादा प्ले स्कूल: जिला समाज कल्याण कार्यालय में आए आवेदनों के अनुसार सबसे ज्यादा प्ले स्कूलों की संख्या शहरी क्षेत्र में है। शहर के अरगोड़ा इलाके में सबसे अधिक प्ले स्कूल संचालित हो रहे हैं। वहीं सोनाहातू और तमाड़ सहित कई प्रखंडों में भी प्ले स्कूल संचालित किए जा रहे हैं।
एक्ट के अनुसार रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य : प्ले स्कूलों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने झारखंड राज्य प्ले स्कूल (विनियमन एवं नियंत्रण) नियमावली को मंजूरी दी है। इसके तहत सभी प्ले स्कूलों को महिला एवं बाल विकास विभाग से रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। नियमावली के तहत स्कूल भवन में सीसीटीवी, बच्चों के लिए अलग से आराम करने के लिए कमरा, बच्चों के अनुसार शौचालय, खेलने का सामान उपलब्ध कराना आदि शामिल हैं। वहीं, ट्रेंड टीचर को ही रखने का नियम है। लेकिन, विशेष कर शहर के प्ले स्कूलों में इसकी अनदेखी की जाती है।
रजिस्ट्रेशन के बाद नियमों पर खरा उतरना होगा: गली-मोहल्ले में भी प्ले स्कूल संचालित हो रहे हैं। कई जगह एक-दो कमरे के मकान में भी प्ले स्कूल चल रहे हैं। जहां पढ़ाई के नाम बच्चों के अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जाती है। बदले में बच्चों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं। ऐसे में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए विभिन्न नियमों पर उन्हें खरा उतरना होगा। यही वजह है कि ऐसे प्ले स्कूल संचालक रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन देने से भी बच रहे हैं। हालांकि, जांच में पकड़े जाने पर ऐसे लोगों पर कार्रवाई होगी।