रांची। को-आॅपरेटिव बैंक की दो शाखाओं में लोन देने में कथित रूप से अनियमितता बरतने के मामले में कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार अलग-अलग जिलों के को-आॅपरेटिव बैंक का स्पेशल आॅडिट कराने जा रही है। बुधवार को उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद यह पहली बार है जब सभी को-आॅपरेटिव बैंकों का स्पेशल आॅडिट कराया जायेगा। उन्होंने बताया कि लोन देने में अनियमितता मामले में दोषी पाये जाने पर किसी को बख्शा नहीं जायेगा। कृषि मंत्री ने कहा कि बैंक एक स्वायत्त संस्था और उससे संबंधित कोई भी फाइल या कागजात उनकी टेबल पर नहीं आता। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी तरह की कोई घोटाले की बात तो सामने नहीं आयी है। दो बैंकों की शिकायत आयी है कि वहां लोन नियम के विरुद्ध दिया गया। मंत्री ने कहा कि जबकि कोई एनपीए की बात नहीं है, जांच की रिपोर्ट आयी है कोई घोटाले की बात भी नहीं है।
दरअसल, जिन्होंने लोन लिया, उन्होंने लोन का चुकता किया है। उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव द्वारा जांच भी करायी गयी है और इस मामले में 15 दिन पहले ही वित्त विभाग को लिखा गया है कि उन बैंकों की विशेष आॅडिट की जाये। अब तो सभी को-आॅपरेटिव बैंकों की स्पेशल आॅडिट करायी जायेगी। इस मामले में कृषि विभाग की सचिव पूजा सिंघल ने कहा कि को-आपरेटिव बैंक में प्रशासक के स्तर पर सारी कार्रवाई की जाती है। कुछ अनियमितता की शिकायत मिलने पर जांच दल बनाया गया और प्राइम फेसी चाइबासा और एक अन्य जिले में कतिपय अनियमितताएं प्रमाणित हुई हैं। रिपोर्ट में गंभीर चार्जेज हैं। कहा कि अब एक तो स्पेशल आॅडिट के लिए एकाउंटेंट जनरल को लिखा गया है। दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन दो अधिकारियों में एक विभाग के हैं, जिनके खिलाफ प्रपत्र क गठित कर कार्रवाई होगी, जबकि दूसरे आइएएस हैं, इसलिए इसके लिए कार्मिक विभाग को लिखा जायेगा।
क्या है मामला
दरअसल राज्य के को-आॅपरेटिव बैंक में लोन देने के मामले में एक कथित घोटाले को लेकर झारखंड हाइ कोर्ट में पीआइएल दाखिल की गयी है। इसमें कहा गया है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे को-आॅपरेटिव बैंकों से लोन दिये गये हैं। याचिका में मंत्री के अलावा विभाग के दो अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गयी है।