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    सांगठनिक प्रबंधन में संसाधनों की कमी से जूझता झामुमो

    azad sipahi deskBy azad sipahi deskAugust 9, 2019Updated:August 9, 2019No Comments6 Mins Read
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    राजधानी रांची के बरियातू में रिम्स के पास पहुंचते ही आपको ढेर सारे साइन बोर्डों में एक बोर्ड झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय कार्यालय का भी मिलेगा। लेकिन यह कार्यालय कहीं से ऐसा नहीं लगता कि इसके भीतर राज्य की सत्ता हासिल करने की जद्दोजहद में जुटी पार्टी की रणनीति बनती होगी। आठ कट्ठे के भूखंड पर बने इस कार्यालय में आधुनिकता का नामो-निशान नहीं है, जबकि दूसरे राजनीतिक दलों के राज्य मुख्यालय किसी कॉरपोरेट कंपनी के दफ्तर का एहसास दिलाते हैं। झामुमो का केंद्रीय कार्यालय पहले बरियातू रोड में ही कुछ सौ मीटर के फासले पर था। 2004 में यह वर्तमान परिसर में शिफ्ट हुआ ।
    झामुमो के केंद्रीय कार्यालय में इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सुविधाओं का अभाव है। एस्बेस्टस की छतवाला यह केंद्रीय कार्यालय सुविधाओं के मामले में अन्य पार्टियों की तुलना में कहीं नहीं ठहरता। ऐसा नहीं है कि झामुमो के केंद्रीय कार्यालय में जमीन का अभाव है। पार्टी के कार्यालय के पास आठ कट्ठा जमीन है। पर जो जमीन उपलब्ध है उसके अनुसार भवन का निर्माण नहीं कराया गया। इससे दिक्कत होती है। वर्तमान में पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में मुख्य कक्ष, कंप्यूटर सेक्शन और कांफ्रेंस हॉल है, पर यह जरूरतों के मुताबिक बेहद छोटा है।
    कार्यकर्ताओं को होती है परेशानी
    झारखंड की दूसरी प्रमुख पार्टी होने के कारण इसके कार्यकर्ताओं की संख्या भी झारखंड में कम नहीं है। पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में जगह की कमी और अन्य सुविधाओं के अभाव में उन्हें दिक्कत होती है। पार्टी के कार्यकर्ताओं का गुरुजी और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के आवास पर पहुंचना उतना सरल नहीं है, जितना पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में। वे आवास पर असहज महसूस करते हैं, क्योंकि वहां सुरक्षा संबंधी तामझाम और आवासीय परिसर की व्यवस्थाओं का बंधन रहता है। किसी कार्यक्रम या बैठक में शामिल होने के लिए आवास में पहुंचने पर कार्यकर्ताओं के बैठने तक की व्यवस्था नहीं हो पाती। इससे पार्टी को विधानसभा चुनावों में परेशानी हो सकती है।
    झामुमो के केंद्रीय कार्यालय के मुख्य कक्ष में एक समय में अधिक से अधिक पंद्रह से बीस लोग बैठ सकते हैं। इससे अधिक संख्या में लोग पहुंचे, तो उन्हें या तो बाहर खड़ा होना पड़ता है या फिर वे इधर-उधर घूमते रहते हैं। यहां तक कि एक समय में यदि रांची के सभी मीडिया समूहों के पत्रकार वहां पहुंच जायें, तो उन्हें भी बैठने की जगह नहीं मिलेगी। यही नहीं पार्टी अगर यहां कोई बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन करना चाहे, तो ऐसा करना भी वर्तमान परिस्थितियों में मुश्किल होगा।
    2014 के विधानसभा में चुनाव में 19 विधायक झामुमो के टिकट से जीते। 2019 में एक सांसद भी बने। आगामी विधानसभा चुनावों में झारखंड में भाजपा को कोई पार्टी टक्कर दे सकती है, तो वह झामुमो ही है। यहां तक की केंद्रीय पार्टी होने के बाद भी कांग्रेस झामुमो को संख्या बल में टक्कर देने की स्थिति में नहीं है। पर केंद्रीय कार्यालय की स्थिति की तुलना की जाये, तो भाजपा, कांग्रेस और आजसू के बाद ही झामुमो का नंबर आयेगा। झामुमो और भाजपा के पार्टी कार्यालयों की तुलना की जाये, तो जहां भाजपा कार्यालय तीन मंजिला और सभी सुविधाओं से युक्त है, वहीं झामुमो कार्यालय सिर्फ एक मंजिल का ही है। कार्यालय में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों का पार्टी को भी अंदाजा है। यही वजह है कि कार्यालय को अपग्रेड करने की दिशा में पार्टी काम कर रही है। चुनाव से पहले केंद्रीय कार्यालय में रंग-रोगन के साथ नया हॉल और नये रूम का निर्माण चल रहा है। पार्टी के केंद्रीय कार्यालय के मुख्य द्वार को जहां हरे रंग से रंगा जा रहा है, वहीं इसकी दीवारों की भी पुताई चल रही है।

    अभी झामुमो की गतिविधियों के तीन केंद्र हैं
    वर्तमान में झामुमो की गतिविधियों के रांची में तीन केंद्र हैं। इनमें पार्टी अध्यक्ष शिबू सोरेन का आवास, कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन का कांके रोड स्थित आवास और पार्टी के बरियातू स्थित केंद्रीय कार्यालय का स्थान आता है। पार्टी के बरियातू स्थित केंद्रीय कार्यालय से पार्टी की सांगठनिक गतिविधियां संचालित की जाती है। यहां प्रेसवार्ता भी होती है। वहीं पार्टी से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन गुरुजी के मोरहाबादी स्थित आवास में किया जाता है। नेता प्रतिपक्ष के रूप में हेमंत सोरेन के आवास में प्रेसवार्ता का आयोजन किया जाता है।
    कार्यालय को अपग्रेड किया जा रहा है
    झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने अन्य पार्टियों की तुलना में कार्यालय में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को स्वीकारा। उन्होंने कहा कि यह सही है कि हम आज के समय के हिसाब से वेश नहीं बना सके हैं। पर झामुमो का गठन झारखंड की जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हुआ है। यह झारखंडियों के पलायन और विस्थापन को रोकने के लिए गठित पार्टी है। आधुनिक समय की जरूरतों के हिसाब से पार्टी धीरे-धीरे कदमताल करने में लगी हुई है। इस लिहाज से पार्टी के केंद्रीय कार्यालय को भी अपग्रेड किया जा रहा है और विधानसभा चुनावों से पहले यह काम पूरा कर लिया जायेगा। वह बताते चलें कि केंद्रीय कार्यालय में लगभग तीन सौ कार्यकर्ताओं के बैठने लायक हॉल बनवाया जा रहा है। इसके अलावा पार्टी के पदाधिकारियों के लिए तीन कमरों का भी निर्माण कराया जा रहा है। पार्टी के पास कांफ्रेंस कक्ष और सोशल मीडिया रूम पहले से ही है। इससे पार्टी की वर्तमान जरूरतों की पूर्ति हो जायेगी। विधानसभा चुनावों से पहले यह काम कर लिया जायेगा। इससे कार्यालय बेहतर हो जायेगा।
    कॉरपोरेट स्टाइल में बना है आजसू कार्यालय
    झारखंड के प्रमुख दलों में से एक आजसू पार्टी का कार्यालय कॉरपोरेट स्टाइल में बना हुआ है। हरमू में सहजानंद चौक के पास स्थित इस कार्यालय में पार्टी सुप्रीमो का आॅफिस, मीडिया लाउंज, पदाधिकारियों का आॅफिस और कांफ्रेंस हॉल है। कार्यालय में हर तकनीकी सुविधा उपलब्ध है। यह वास्तु के हिसाब से भी डिजाइन किया गया है। 24 नवंबर 2018 को इसका उद्घाटन पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो और उनकी पत्नी नेहा महतो ने संयुक्त रूप से किया था।
    भाजपा कार्यालय में सुइट की भी सुविधा
    वर्ष 2004 में बना भाजपा का हरमू रोड स्थित कार्यालय सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है। तीन मंजिला इस भवन में भोजनालय के साथ सुइट की भी व्यवस्था है। कार्यालय में एक बड़ा हॉल है, जिसमें लगभग तीन सौ लोग बैठ सकते हैं। वहीं एक छोटा हॉल है, जिसमें तीस लोगों के बैठने की व्यवस्था है। इसके अलावा यहां पार्टी के पदाधिकारियों के लिए भी अलग-अलग कमरों की व्यवस्था है। तकनीकी सुविधा से युक्त सोशल मीडिया सेल भी यहां है।

    JMM struggles with lack of resources in organizational management
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