भाजपा को मिलेगा इसका बड़ा राजनीतिक लाभ
लोहरदगा के किस्को प्रखंड के चामटोली का मंगल भगत शुक्रवार को लोहरदगा ट्रेन से रांची पहुंचा था। स्टेशन पर उतरने के बाद उसने हरमू का रास्ता पूछा और पैदल ही उधर रवाना हो गया। जब उससे पूछा गया कि वह हरमू क्यों जाना चाहता है, तो उसका जवाब था कि आज उसके बैंक खाते में 10 हजार रुपये जानेवाले हैं और वह मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना के उद्घाटन समारोह में जा रहा है। उसे यह पता नहीं था कि इसका उद्घाटन कौन करेगा, लेकिन रघुवर दास उसके खाते में पैसा जमा करेंगे, यह जानकारी उसे थी। मंगल भगत के चेहरे पर संतोष के भाव थे और साथ में खुशी की एक लहर भी। इस बार कमजोर मॉनसून ने उसके दो एकड़ खेत को बंजर ही रख दिया है। थोड़ी-बहुत सब्जी की खेती उसने की है, लेकिन पैसे के अभाव में सिंचाई नहीं हो रही है। मंगल ने 10 हजार रुपये का बजट भी तैयार कर लिया था। करीब सात हजार रुपये उसे खाद और पानी पर खर्च करना होगा। एक हजार रुपये कर्ज चुकायेगा और बाकी दो हजार रुपये खाते में रखेगा, ताकि वक्त पर काम आये।
मंगल की तरह राज्य भर के करीब 15 लाख किसानों के खातों में आज रघुवर दास सरकार ने योजना की रकम भेजी है। पांच हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अधिकतम पांच एकड़ जमीन के मालिक किसानों को अधिकतम 25 हजार रुपये तक की रकम सरकार ने दी है। यह रकम उनके लिए बड़ी राहत है। कमजोर मॉनसून के कारण कमजोर खेती की समस्या से जूझ रहे किसानों के सपनों को यह रकम पंख देगी।
छोटी-छोटी जरूरतें होंगी पूरी
यह हकीकत है कि किसानों को एकमुश्त बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती है, बल्कि उन्हें अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए हजार-दो हजार रुपये की जरूरत होती है और इसके लिए ही वे कर्ज लेते हैं। कर्ज का ब्याज इतना अधिक हो जाता है कि वे इसके बोझ तले दबते जाते हैं। मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना न केवल उन्हें इस बोझ से मुक्ति दिलायेगी, बल्कि उनके विकास को नया आयाम भी देगी। उन्हें खाद, बीज और कीटनाशक आदि खरीदने के लिए कर्ज नहीं लेना होगा। घर-परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए खेत गिरवी नहीं रखने होंगे। इस तरह उनकी आर्थिक और सामाजिक हैसियत बढ़ेगी और वे मन लगा कर खेती कर सकेंगे।
हर साल 31 हजार रुपये तक मिलेंगे
झारखंड के किसानों को अब हर साल 31 हजार रुपये तक मिलेंगे। यदि किसी किसान के पास पांच एकड़ तक जमीन है, तो उसे राज्य सरकार 25 हजार रुपये देगी और केंद्र सरकार से छह हजार रुपये मिलेंगे। एक एकड़ जमीन वाले किसान को राज्य सरकार पांच हजार और केंद्र सरकार छह हजार रुपये देगी। सबसे बड़ी बात यह है कि यह रकम सीधे उनके बैंक खाते में जायेगी। इसके लिए उन्हें न तो सरकारी दफ्तरों की चक्कर लगाना होगा और न ही बाबुओं की चिरौरी करनी होगी। अब से पहले किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कितना परेशान होना पड़ता था, यह किसी से छिपा नहीं है।
राजनीतिक लाभ
आज के दौर में यह स्वाभाविक ही है कि मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना को भी राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है। यह सही है कि रघुवर दास ने इस योजना की शुरुआत का वक्त ऐसा चुना है कि इसका अधिकतम लाभ उठाया जा सके। राज्य में विधानसभा के चुनाव कुछ ही महीने दूर हैं। रघुवर दास सरकार झारखंड की अब तक की ऐसी पहली सरकार है, जिसके खिलाफ कोई मुद्दा विरोधी दलों के पास नहीं है। एक मुद्दा किसानों की बदहाली का हो सकता था, लेकिन इस योजना ने उसे भी विपक्षियों के हाथ से छीन लिया है। विरोधी दल अब यह तो नहीं ही कह सकते कि रघुवर सरकार ने किसानों की चिंता नहीं की और उनके कल्याण के लिए कोई कदम नहीं उठाया। दूसरी तरफ रघुवर दास को बिना कुछ कहे राज्य के 35 लाख किसान परिवारों का आशीर्वाद हासिल हो गया है। इस तरह इस योजना को एक बड़ा राजनीतिक कदम माना जा सकता है।
कुल मिला कर मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना मुख्यमंत्री रघुवर दास का ऐसा मास्टर स्ट्रोक है, जिसकी काट फिलहाल नजर नहीं आ रही है। रघुवर दास सरकार झारखंड की अब तक की पहली ऐसी सरकार है, जिसके खिलाफ न भ्रष्टाचार का कोई आरोप लगा और न ही बड़ी प्रशासनिक विफलता का। इस सरकार की यही सबसे बड़ी कामयाबी है। और इस कामयाबी में मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना ने एक और बड़ा अध्याय जोड़ दिया है। विरोधी भले ही इस योजना की आलोचना करें, लेकिन यह सच है कि इस योजना से किसानों की आय दोगुनी करने के सपने को पूरा करने की दिशा में एक मजबूत कदम झारखंड ने बढ़ाया है।
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