कोरोना काल में नीट और जेइइ मेंस आयोजित करने के फैसले के खिलाफ गैर-एनडीए शासित राज्यों ने केंद्र सरकार के खिलाफ बुधवार को मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा आयोजित वर्चुअल बैठक में इन परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का फैसला किया गया। बैठक में झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री शामिल हुए और उन्होंने जीएसटी, महंगाई, बेरोजगारी और नयी शिक्षा नीति को लेकर केंद्र पर हमला बोला।
केंद्र की मनमानी के खिलाफ हमारी चुप्पी घातक : हेमंत
आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि आखिर हम कब तक केंद्र की मनमानियों को बर्दाश्त करेंगे। हमारी यह चुप्पी घातक साबित हो रही है। अब समय आ गया है कि हमें मुखर होना होगा। हम सिर्फ बैठ कर बातें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने अपनी मनमानी करते हुए राज्यों की रीढ़ जीएसटी के जरिये तोड़ दी है। हमने बार-बार कहा कि राज्यों को इसमें थोड़ी ढील दी जाये। जीएसटी लगाकर केंद्र पूरे राजस्व पर कुंडली मारे बैठा है। कोरोना काल में राज्यों को भी केंद्र की ओर से बजट मिलना चाहिए। आज सारी वित्तीय शक्तियां केंद्र के पास हैं। इनका विकेंद्रीकरण जरूरी है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को ये बातें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बुलायी गयी गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में कही।
पहले राष्ट्रपति, पीएम से बात करें
हेमंत ने कहा कि नीट और जेइइ की परीक्षा तो होनी ही चाहिए, लेकिन इसमें जल्दबाजी हो रही है। मेरे राज्य में स्थिति यह है कि हमारे पास बहुत कम केंद्र हैं। छात्रों को समायोजित करने के लिए हमें सभी होटल और बसों की जरूरत होगी। दूसरे राज्यों के बच्चे भी अभिभावकों के साथ आयेंगे। इससे कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ेगा। केंद्र को अधिक समय देकर सुविधा प्रदान करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कुछ गलत हुआ, तो केंद्र सभी राज्यों को फिर से दोषी ठहरायेगा। हमें इन मुद्दों को संयुक्त रूप से उठाना होगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले हमें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पास जाना चाहिए।
केंद्र हमारे संसाधन बेचने में लगा है
हम सामूहिक रूप से केंद्र की नीतियों का विरोध नहीं कर पाये हैं। महंगाई, बेरोजगारी समेत अन्य मुद्दों पर हेमंत सोरेन ने कहा कि युवाओं में रोजगार को लेकर आक्रोश है। निजीकरण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अब तो केंद्र हमारे संसाधनों को भी बेचने लगा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर गैर-भाजपा शासित राज्यों से भेदभाव का भी आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर दूसरे राज्यों के मंत्रियों और विधायकों को भी परेशान करने का आरोप लगाया। हेमंत ने कहा कि आखिर कब तक केंद्र गैर भाजपा सरकारों को परेशान करता रहेगा। हमें मिलकर इसका विरोध करना ही होगा। हेमंत सोरेन ने कहा कि बेरोजगारी और महंगाई से जनता परेशान है। ये दोनों ही समस्याएं देश में चरम पर हैं। महंगाई के बावजूद केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा रही है।