पार्टी नेतृत्व को लेकर कांग्रेस पार्टी में मचे घमासान के बीच अब नेताओं के मध्य मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में राहुल गांधी के ‘भाजपा से सांठ-गांठ’ वाले बयान पर जमकर हंगामा हुआ। कपिल सिब्बल और गुलामनबी आजाद जैसे वरिष्ठ नेताओं ने तो नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए तन-मन से जुड़ने के बाद भी आरोप लग रहे हैं।
कपिल सिब्बल ने सोमवार को ट्वीट कर कहा, ‘’राहुल गांधी कहते हैं कि भाजपा के साथ सांठ-गांठ है। जबकि हमने राजस्थान हाई कोर्ट में पार्टी को सफलता दिलाई। मणिपुर में भाजपा के खिलाफ पूरी ताकत से पार्टी का बचाव किया। पिछले 30 साल में भाजपा के पक्ष में एक भी बयान नहीं दिया। फिर भी हम पर भाजपा से सांठ-गांठ का आरोप लग रहा है।’’
वहीं गुलाम नबी आजाद ने राहुल के बयान पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी का “भाजपा से मिलीभगत” वाला आरोप सही साबित हुआ तो वे इस्तीफा दे देंगे।
दरअसल कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में राहुल गांधी ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखने वाले कांग्रेस के नेताओं को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष नहीं बनना चाहती थीं लेकिन पार्टी के लिए ये जिम्मेदारी उठाई। ऐसे में जब पार्टी राजस्थान और मध्य प्रदेश में विरोधी ताकतों से लड़ रही थी और सोनिया जी अस्वस्थ थीं तो उस समय नेतृत्व को लेकर पत्र क्यों लिखा गया? विषम परिस्थितियों में संगठनात्मक बदलाव को लेकर सवाल खड़े करना कहां तक उचित है?