आंखों देखी, कानों सुनीं फिर भी है इंकार

कोरोना की दूसरी लहर के कहर को लोग शायद ही कभी भूल पायें। अस्पताल में ऑक्सीजन को लेकर अफरा-तफरी का माहौल। राज्य सरकारों की चिल्लाहट। बार-बार ऑक्सीजन की कमी से मौतों का रोना। सरकार से लेकर न्यायालयों तक में सरगर्मी। लोगों के परिजनों का बुरा हाल। इन मंजरों को देश ने देखा-सुना। केंद्र सरकार की लानत-मलालत। लेकिन अब जब बात अपने पर आयी है, तो राज्य सरकारों ने पलटनिया मार दिया है। आपको जान कर यह हैरानी होगी कि ऑक्सीजन का रोना रोनेवाले राज्यों में से 15 राज्यों ने केंद्र को यह लिख कर दिया है कि उनके यहां ऑक्सीजन से मौत नहीं हुई है। यही बात जब राज्यों के हवाले से केंद्र सरकार के मंत्री ने लोकसभा में बयान दिया, तो गैर भााजपा शासित राज्यों के राजनीतिक दलों ने आसमान सिर पर उठा लिया। सोशल मीडिया में केंद्र सरकार की आलोचनाओं की बाढ़ सी आ गयी। लेकिन अभी-अभी 15 राज्यों की सरकारों ने यह लिख कर दिया है कि उनके यहां ऑक्सीजन से मौत नहीं हुई है। इसमें दिल्ली की अरविंद केजरीवाल की सरकार भी है। कह रही है कि हमने तो डाटा ही तैयार नहीं किया। इसका दोष एक बार फिर वह केंद्र सरकार पर मढ़ रही है, जबकि कोरोना की दूसरी लहर में दिल्ली सरकार और उसके मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गला फाड़ फाड़ कर चिल्ला रहे थे कि ऑक्सीजन की कमी से मौतें हो रही हैं। वे हर रोज ऑक्सीजन की कमी का रोना रो रहे थे। बड़ा सवाल कि आखिर राज्य सरकारें ऑक्सीजन  से मौत का आंकड़ा क्यों छिपा रही है? स्वास्थ्य सेवा राज्यों के अधीन होती है। ऑक्सीजन से मौत हुई या नहीं यह राज्य सरकार को देखना है। केंद्र को राज्यों से जो आंकड़ा दिया जायेगा, केंद्र उसी आधार पर अपना वक्तव्य देगा। लोकसभा में किसी लिखित प्रश्न का उत्तर राज्यों से मिली रिपोर्ट के आधार पर ही दिया जाता है। जब राज्यों ने ऑक्सीजन से मौत का आंकड़ा ही नहीं दिया, तो केंद्र सरकार लोकसभा में इसे कैसे पेश कर सकती है। ऐसी स्थिति में अगर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने यह कहा कि ऑक्सीजन की कमी से मौत का कोई मामला नहीं मिला है, क्योंकि किसी राज्य ने यह नहीं कहा कि ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत हुई है। तो इस पर बवाल क्यों हो रहा था? दरअसल हो यह रहा है कि जाने वाले चले गये। परिवार वाले आज भी उस दंश को झेल रहे। स्वास्थ्य विभाग आंकड़ा नहीं दे रहा। राजनीतिक दल इस पर राजनीति कर उनके दर्द को और बढ़ा रहे। जब आंखों देखी, कानों सुनीं से भी इंकार किया जाये, तो कोई कुछ नहीं कर सकता है। इन तमाम पहलुओं पर आजाद सिपाही के राजनीतिक ब्यूरो की रिपोर्ट।

अगर अपनी याददाश्त पर जोर डालें, तो कोरोना की दूसरी लहर की एक तसवीर जरूर याद आयेगी। आगरा में एक महिला अस्पताल के सामने पति की जान बचाने के लिए अपने मुंह से सांस देने का प्रयास कर रही थी। पति की मौत के बाद महिला ने कहा, ‘अस्पताल के सामने मैं रोती रही कि मेरे पति को भर्ती कर लो। एक डॉक्टर और नर्स बाहर आये। मेरे पति को देखा और कहा, हमारे पास ऑक्सीजन -बेड नहीं है। हम भर्ती नहीं कर पायेंगे। इस बीच अस्पातल गेट पर ही मेरे पति बेहोश हो गये। मैं अकेली थी, कुछ समझ में नहीं आया तो मैंने उनका मुंह खोला और सांस देने लगी, लेकिन वो नहीं बचे। महिला ने कहा, मुझे और 16 साल की बेटी को छोड़कर चले गये। ऑक्सीजन न मिलना ही उनकी मौत का कारण बना।’ यह आगरा की एक महिला की कहनी है। महिला तो घटना की पीड़ित है। इस पीड़ा को तसवीरों के साथ करोड़ों लोगों ने देखा, पढ़ा और सुना। यह तो केवल एक घटना है। हर राज्य से कोरोना की दूसरी लहर के समय ऑक्सीजन की कमी से मौत का मामला देखने-सुनने को मिला। दूसरी लहर के पीक के 43 दिन में ऑक्सीजन की कमी से 629 मौत होने की खबर मीडिया में आयी थीं। न जाने यह संख्या कतनी हो। करोड़ों लोगों ने इस तरह के मामले देखा, सुना और झेला। यहां तक कि अदालत का हस्तक्षेप हुआ। पर अब राज्यों के स्वास्थ्य विभाग को ऑक्सीजन से मौत होने की सूचना ही नहीं है। गैर भाजपा शासित राज्यों के सत्ताधारी दल के नेताओं न कुछ नहीं देखा, कुछ नहीं सुना। उनकी राज्य सरकारें कह रही हैं, उनके वहां ऑक्सीजन की कमी से मौत नहीं हुई।

केंद्र सरकार ने मांगा था आकड़ा
राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान 20 जुलाई को कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार से सवाल पूछा था कि क्या ये सच है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से बड़ी संख्या में मरीजों की मौत हुई? सरकार की ओर से स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉक्टर भारती प्रवीण पवार ने लिखित जवाब में कहा कि स्वास्थ्य राज्यों का विषय है। उनकी ओर से कोरोना से हुई मौत की सूचना दी जाती है, लेकिन इसमें ऑक्सीजन की कमी से किसी भी मौत की सूचना नहीं है। इस सवाल पर जमकर हंगामा भी हुआ था। बाद में केंद्रीय मंत्री ने सभी 28 राज्यों को एक पत्र लिखा और 13 अगस्त तक अपने-अपने यहां से ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के आंकड़े भेजने के लिए कहा।

10 राज्यों ने कहा, एक भी मौत नहीं, बाकी ने कहा, अभी हम जांच रहे हैं
देश के 28 में से केवल 15 राज्यों ने कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत का आंकड़ा केंद्र सरकार को भेज दिया है। इनमें से 10 राज्य छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, असम, ओड़िशा, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश ने लिखा है कि उनके यहां एक भी मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई है। पंजाब ने कहा कि उनके यहां चार मौतों की जांच चल रही है, लेकिन वो ऑक्सीजन की कमी से हुई हैं, अभी इसको लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता। यहां तक कि दिल्ली ने भी ऑक्सीजन से मौत के मामले को साफ नहीं किया। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, पश्चिम बंगाल और हरियाणा की ओर से हमें कोई जवाब नहीं मिला है।

न जाने इंतजार कब होगा खत्म
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की मांग बढ़ी यह हकीकत है। क्योंकि सदन में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में आॅक्सीजन की मांग काफी बढ़ गयी थी। पहली लहर में जहां 3,095 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग थी, तो दूसरी लहर में यही मांग 9,000 मीट्रिक टन तक पहुंच गयी थी। ऑक्सीजन की कमी हुई थी, तभी दिल्ली हाइकोर्ट ने खुद संज्ञान लिया था। कमी के कारण ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो बार बैठक बुलायी। हर राज्य में लोग ऑक्सीजन के परेशान रहे। ऑक्सीजन की कमी से जिनकी मौत हुई, उनके परिवार को मरहम की जरूरत है। कम से कम शब्दों का मरहम तो चाहिए ही। उसकी जगह उन्हें इस मुद्दे पर सियासत होता दिख रहा है। विपक्षी दल केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है। केंद्र सरकार राज्यों से रिपोर्ट नहीं मिलने की बात कर रही। हकीकत यह है कि स्वास्थ्य व्यवस्था राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार की जिम्मेदारी इसमें मदद करने की है। राज्य सरकार ही केंद्र को आंकड़ा उपलब्ध करायेगी। तभी केंद्र कितने लोगों की मौत हुई यह बता पायेगा। जब राज्यों ने अपने यहां ऑक्सीजन की कमी से मौत का लिखित सूचना मांगने पर दिया ही नहीं, तो फिर केंद्र सरकार जिम्मेदार कैसे। नतजीतन ऑक्सीजन से मौत हुई या नहीं फिलहाल अधर में ही है। न जाने हकीकत कब सामने आयेगी, लोगों को फिलहाल इंतजार है कि सच्चाई सामने आये और कुछ राहत की भी बात हो।

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