- पुलिस से सवाल : खरीदने के आरोप में जब तीन मजदृूर जेल भेजे जा सकते हैं, तो बिकने के आरोप में तीन विधायक क्यों नहीं
- रूपा तिर्की कांड में दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए सीबीआइ जांच जरूरी.
- नगर निगम एक तरफ तो एक मंत्री की पत्नी के नाम से बने होटल को कुछ जुर्माना लगा कर छोड़ दे रहा है, दूसरी तरफ सेवा सदन जैसे प्रतिष्ठित अस्पताल को तोड़ने का फरमान सुना रहा है, यह विडंबना है।
- धनबाद के एसपी की कार्यशैली सवालों के घेरे में, पलामू के एक अपहरणकांड की जांच कराये सरकार
रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह के साथ हेमंत सोरेन की सरकार को अस्थिर करने, धनबाद में जज हत्याकांड की जांच में पुलिस की कार्यशैली और गोड्डा में दारोगा रूपा तिर्की की कथित आत्महत्या मामले में खुल कर बात की। बातचीत में उन्होंने कहा कि हमने यह तो सुना था कि दाल में कुछ काला है, लेकिन यहां तो हमे लगता है कि पूरी दाल ही काली है।
हेमंत सोरेन सरकार को अस्थिर करने के बारे में उन्होंने कहा कि एक दिन अचानक यह खबर आयी कि कुछ लोग झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार को गिराने की साजिश में जुटे हैं। कांग्रेस विधायक अनूप सिंह उर्फ जयमंगल सिंह के आवेदन पर पुलिस अचानक रेस हो गयी। जांच के नाम पर उसने लोगों के सामने जो प्रथम तथ्य प्रस्तुत किये, उस पर किसी भी गंभीर व्यक्ति को विश्वास हो ही नहीं सकता। पुलिस ने तमाम धाराओं के साथ राजद्रोह का मामला दर्ज करते हुए बोकारो से दो और रांची से एक सामान्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेजा। उन्होंने कहा कि पुलिस ने यह कहानी बनायी कि बोकारो से गिरफ्तार अमित सिंह, निवारण प्रसाद महतो और रांची से गिरफ्तार अभिषेक दुबे कांग्रेस के दो विधायकों इरफान अंसारी और उमाशंकर अकेला और एक निर्दलीय विधायक अमित यादव को लेकर दिल्ली गये और वहां विधायकों की खरीद करनेवाले लोगों से इनकी मुलाकात करवायी। पुलिस ने कहा कि उसे उनमें से एक व्यक्ति द्वारा एयरपोर्ट से फेसबुक पर डाली गयी तसवीर से पता चला कि वे लोग विधायकों को लेकर दिल्ली जा रहे हैं। जरा सोचिए, अगर कोई व्यक्ति सरकार गिराने के लिए विधायकों को लेकर दिल्ली जायेगा तो वह एयरपोर्ट से अपनी तसवीर शेयर कर यह बतायेगा कि वह दिल्ली जा रहा है। यही नहीं, पुलिस की यह कहानी भी कम हास्यास्पद नहीं है कि विधायकों को खरीदनेवाले लोग अपनी असली पहचान के साथ रुपया-पैसा लेकर रांची के होटल लीलैक में रुके थे और विधायकों का मोल-तोल कर रहे थे। यह कहानी किसी के भी गले नहीं उतर सकती, लेकिन पुलिस ने यह कहानी मीडिया के सामने रखी। उन्होंने पुलिस से ही सवाल किया कि अगर सचमुच में हेमंत सोरेन की सरकार को अस्थिर करने की कोशिश हो रही थी और तीन विधायकों को लेकर ये मजदूर किस्म के लोग दिल्ली गये थे, तो उनके साथ ही इन विधायकों के ऊपर भी केस क्यों नहीं किया जा रहा है।
विधायकों को लेकर जानेवाले अगर दोषी हैं, जो विधायक इरफान अंसारी, उमाशंकर अकेला और अमित यादव, (ये तीनों नाम पुलिस ने ही उजागर किये हैं) जो बिकने के लिए जा रहे थे, उन्हें पुलिस ने अभियुक्त क्यों नहीं बनाया। उन्हें गिरफ्तार कर जेल क्यों नहीं भेजा। यही नहीं, एक हफ्ता तक मुंबई की सैर कर पुलिस अधिकरी रांची लौटे हैं। वे क्यों नहीं बताते कि मुंबई में उनके हाथ क्या-क्या लगे। उन्होंने वहां क्या-क्या पाया। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह सामान्य सी बात है कि अगर झारखंड में भाजपा के नेता हेमंत सोरेन की सरकार को गिराने की कोशिश कर रहे थे, तो इस कांड में पकड़े गये तीन लोगों की पहचान तो उनसे होनी चाहिए थी। उनसे संपर्क तो उनका होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मेरा कोई संबंध उन लोगों से नहीं है, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश का संबंध उन लोगों से नहीं है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का संबंध उन लोगों से नहीं है, तो फिर वे किसके कहने पर खरीद-फरोख्त करवा रहे थे, वह भी एयरपोर्ट से तसवीर शेयर कर और होटल में अपनी असली पहचान बता कर। उन्होंने कहा कि अगर यह सही है, तो पुलिस तत्काल इरफान अंसारी, उमाशंकर अकेला और अमित यादव को जेल भेजे। और अगर गलत है, तो निर्दोष तीनों मजदूर किस्म के लोगों को तत्काल रिहा करे। उन्होंने कहा कि वे पूरी शिद्दत के साथ पुलिस की इस झूठी कहानी को लोगों के सामने उजागर करेंगे और ब्लॉक स्तर पर आंदोलन कर लोगों को अवगत करायेंगे कि किस तरह की घृणित कहानी के माध्यम से रांची पुलिस आम लोगों को परेशान कर रही है। बाबूलाल ने आजाद सिपाही से कहा कि सरकार तत्काल सीटिंग जज की अध्यक्षता में एसआइटी का गठन करे और पूरे मामले की जांच कराये। उन्होंने कहा कि आश्चर्य होता है कि सरकार गिराने की साजिश में फल बेचनेवाले और ठेका मजदूर को गिरफ्तार कर लिया गया और जो बिकनेवाले विधायक थे, पुलिस ने उनके ऊपर केस ही नहीं किया। जिस पीएनआर नंबर को आधार मान कर पुलिस हेमंत सरकार को अस्थिर करने की साजिश बता रही है, उसी पीएनआर पर दिल्ली की यात्रा करनेवाले विधायकों को क्यों नहीं पकड़ रही। इससे साफ पता चलता है दाल में पूरा ही काला है।
धनबाद के जज उत्तम आनंद की हत्या के मामले में बाबूलाल ने धनबाद के एसपी संजीव कुमार को लपेटे में लिया। उन्होंने कहा कि धनबाद के एसपी संजीव कुमार की विश्वसनीयता शक के घेरे में है। उन्होंने कहा कि धनबाद से पहले संजीव कुमार पलामू के एसपी थे। उस दरम्यान एक परिवार पति-पत्नी छत्तीसगढ़ गये थे, अपने बेटा बहू से मिलने। मिल कर जब वे लौट रहे थे, पलामू के नावा बाजार थाना क्षेत्र में उनकी गाड़ी रोक कर, जिसमें सत्तर साल के बुजुर्ग मिथिलेश प्रसाद बैठे थे अपराधियों ने उन्हें ड्राइवर सहित किडनैप कर लिया। यह घटना 25 मई को घटती है और 26 तारीख को इन लोगों के परिजनों ने नावा बाजार थाना में एफआइआर दर्ज किया। इसके बाद अपराधियों का टेलीफोन आता है कि साठ लाख रुपया लाकर दीजिए, तभी आपके पिताजी और ड्राइवर को छोड़ेंगे। बाद में यह सौदा दस लाख में पटता है। मिथिलेश प्रसाद के परिजन एसपी के सुझाव पर एएसपी, डीएसपी, चैनपुर के थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ पैसा लेकर जाते हैं। अपराधियों को पैसा देते हैं और आज तक वे अपहरणमुक्त नहीं हुए हैं। इससे तो यही लगता है कि इसमें पुलिस भी मिली हुई है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच कराने के लिए हमने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि रूपा तिर्की मामले की जांच सीबीआइ से होनी चाहिए, क्योंकि रूपा तिर्की के परिजनों ने यह मांग की है। उन्होेंने विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा पर सीधा आरोप लगाया है। इसलिए दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए सीएम इस मामले की जांच सीटिंग जज से करायें। बगैर इसके रूपा तिर्की के परिजनों को न्याय नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर खुद आदिवासी समाज सड़क पर उतरा है।
बाबूलाल ने कहा कि डेढ़ साल में झारखंड पुलिस की कार्यशैली में इतनी गिरावट आयी है कि आप कल्पना नहीं कर सकते। पहले यह सुनने में आता था कि जमीन दलालों की हत्या हो गयी, विवाद में हत्या हो गयी, लेकिन अब तो दिनदहाड़े वकील और जज की भी हत्या होने लगी है। उन्होंने कहा कि यह कितना हास्यास्पद है कि जज की हत्या हो जाती है और पुलिस तब तक कोई एक्शन नहीं करती, जब तक जज के परिजन आकर मामला दर्ज नहीं कराते। आखिर पुलिस ने क्यों समय गंवाया। अब पुलिस के समक्ष हत्या हो जाये और पुलिस इस बात का इंतजार करे कि परिजन आकर मामला दर्ज करायें, तो क्या तब तक अपराधी वहां बैठे रहेंगे।
उन्होंने कहा कि डेढ़ साल के शासन काल में झारखंड की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो गयी है। पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। वह तो तस्करों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई करने से डरती है कि पता नहीं पैरवी में किसका फोन आ जाये। उसने एक तरह से आंख मूंद लिया है। सेवा सदन और अतिक्रमण हटाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि बरसात में तो चिड़िया का खोता भी नहीं उजाड़ा जाता। सेवा सदन तो उस समय बना, जब नगर निगम का जन्म भी नहीं हुआ था। वैसे भी सेवा सदन ट्रस्ट की संपत्ति है, किसी की निजी नहीं। ऐसे में नगर निगम को उसके बारे में सहयोगात्मक कदम उठाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। एक तरफ से नगर निगम कांग्रेस के एक मंत्री की पत्नी के नाम से बने होटल को कुछ जुर्माना लगा कर छोड़ दे रहा है, दूसरी तरफ सेवा सदन जैसे प्रतिष्ठित अस्पताल को, जहां आज भी सस्ते में गरीबों का इलाज होता है, तोड़ने का फरमान सुना दिया जाता है। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता यह सब देख रही है।