आजाद सिपाही संवाददाता
धनबाद। हाइप्रोफाइल जज हत्याकांड में ऑटो चालक लखन वर्मा और उसके सहयोगी राहुल वर्मा को रिमांड पर लेकर सीबीआइ कई एंगिल से पूछताछ कर रही है। दोनों अब जेल में बंद हैं। दरअसल सीबीआइ इस निष्कर्ष पर पहुंचना चाहती है कि जज उत्तम आनंद की मौत महज एक हादसा है या एक सोची-समझी साजिश के तहत उनकी हत्या की गयी है। सूत्रों की मानें तो सीबीआइ आरोपियों की ब्रेन मैपिंग और नार्को टेस्ट के लिए भी अदालत में अर्जी लगा सकती है।

सीबीआइ की सीएफएसएल की एक टीम भी धनबाद में कैंप किये हुए है। शनिवार को जज उत्तम आनंद हत्याकांड की जांच के लिए फॉरेंसिक विभाग की टीम ने रणधीर वर्मा चौक के पास घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान सीबीआई की टीम ने गति यंत्र से आवाजाही कर रहे वाहनों की गति को दर्ज किया। उसके बाद घटना के सीन को रीक्रिएट कर यह समझने का प्रयास किया कि उस दिन क्या हुआ होगा। घटना के दिन आॅटो से जज को धक्का मारने के वक्त आॅटो की गति क्या रही होगी। थ्री-डी स्कैनर मशीन से पूरे सीन को दर्शाया गया, जिसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जायेगा।

घटनास्थल पर सीबीआइ और सीएफएसएल टीम शनिवार सुबह करीब 11 बजे पहुंच गयी। टीम ने पूरे इलाके की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की। फिर टीम गंगा मेडिकल हॉल पहुंची। यहां घटनास्थल की तख्ती लगा हुई है। यहां सड़क पर एक आॅटो को दौड़ाया गया। एक पुतला को धक्का मरवाया गया। पुतला सड़क किनारे गिर गया, जिसका सीबीआइ के सदस्यों ने मुआयना किया। केस की जांच में कोई चूक न हो, इसके लिए सीबीआइ काफी सावधानी के साथ आगे बढ़ रही है। इसके लिए सीबीआइ की टीम ने सबसे पहले गुरुवार को एसआइटी के अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले में अब तक मिले सबूतों को जुटाने की कोशिश की। उसके बाद धनबाद थाने में भी केस से संबंधित कागजात और सबूतों की घंटों जांच की गयी। जज हत्याकांड से संबंधित 4 हजार पन्नों की केस डायरी की कॉपी भी सीबीआइ ने ली है।

14 प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारियों के पास कोई बाडीगार्ड नहीं
धनबाद। जिले में कई संवेदनशील मुकदमे अदालतों में चल रहे हैं, लेकिन इनकी सुनवाई कर रहे न्यायिक पदाधिकारियों की सुरक्षा का प्रबंध नहीं है। धनबाद सिविल कोर्ट में 29 न्यायिक पदाधिकारी हैं, जिनमें 11 पदाधिकारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर के, चार अवर न्यायाधीश और 14 प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी हैं। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अवर न्यायाधीश स्तर के अधिकारियों को तो जिला प्रशासन ने अंगरक्षक दे रखा है, परंतु प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारियों के पास कोई बाडीगार्ड नहीं है। न्यायिक दंडाधिकारियों के न्यायालयों में भी कई संवेदनशील मुकदमे चल रहे हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा भगवान भरोसे है। न्यायाधीश उत्तम आनंद के साथ हुई घटना के बाद न्यायकि दंडाधिकारियों की सुरक्षा का मुद्दा चर्चा में है।

न्यायाधीशों को मिली है पर्याप्त सुरक्षा : एसएसपी
इधर धनबाद के एसएसपी संजीव कुमार ने कहा कि महत्वपूर्ण मामलों को देखने वाले न्यायधीशों को अंगरक्षक के अलावा हाउसगार्ड भी दिया गया है। जिन न्यायिक दंडाधिकारियों को बॉडीगार्ड की जरूरत है, उन्हें भी उपलब्ध करा दिया गया है। धनबाद में तो रेल के मजिस्ट्रेट को भी बॉडीगार्ड मिला है। सुरक्षा के मोर्चे पर न्यायाधीश सबसे ऊपर हैं।

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